
शिवपुरी से मोहना तक डिवाइडरों में उग रहीं कटीली झाड़ियाँ, रात में लाइट की चकाचौंध बनती है परेशानी
फोरलेन बनाने वाली कंपनी ने डिवाइडरों में पौधारोपण के लिए दी थी राशि, बंदरबांट करके निपटाई
शिवपुरी। ग्वालियर से देवास तक बनाए गए फोरलेन के बीच में डिवाइडरों में पेड़ पौधे लगाए जाने के लिए जगह छोड़ी गई थी। फोरलेन बने बरसों गुजरने के बाद भी शिवपुरी से मोहना के बीच बनाए गए डिवाइडर खाली पड़े हैं, तथा इनमें कटीली झाड़ियाँ उग आईं। बीच में पेड़ पौधे लगाने से सामने से आने वाली गाड़ियों की लाइट भी परेशानी बनती है।
गौरतलब है कि शिवपुरी से गुना की तरफ हाइवे के डिवाइडर में रंग बिरंगे फूलों को देखकर सड़क से गुजरने वालों को यह नजारा आकर्षक लगता है। जबकि शिवपुरी से ग्वालियर की तरफ जाने वाली रोड के डिवाइडर में अभी तक कोई पौधारोपण नहीं किया गया। जिसके चलते डिवाइडर की खाली जगह पर कटीली झाड़ियाँ व अकौआ के पौधे उग आए हैं। इतना ही नहीं पूरा डिवाइडर कचराघर भी बने हुए हैं। जबकि बीच में डिवाइडर के लिए जगह इसलिए छोड़ी जाती है, ताकि उनमें पेड़ लगाए जाने से हाइवे पर सामने दूसरी साइड से आने वाले वाहनों की हैडलाइट वाहन चालकों के लिए परेशानी बढ़ जाती है। जबकि इसके विपरीत कोटा-झांसी फोरलेन पर डिवाइडर में न केवल फूल पत्तियों के पौधे लगाए गए हैं, बल्कि उनका मेंटेनेंस भी निरंतर होता रहता है। डिवाइडर के बीच में पेड़-पौधे लगाने से न केवल लाइट की चकाचौंध से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ जाती है, बल्कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को भी यह पेड़ काफी हद तक कम कर देते हैं।
ऐसा नहीं है कि डिवाइडर में पेड़ पौधे लगाने के लिए सड़क बनाने वाली कंपनी ने एनएचएआई को भरपूर राशि दी थी, लेकिन उक्त राशि का बंदरबांट करके निपटा दिया गया। यही वजह है कि डिवाइडर अभी भी कचराघर बने हुए हैं।




