
कॉकरोच ने घर में महिलाओं की व देश में नेताओं की नींद उड़ाई: युवाओं में पनप रहा आक्रोश
ईवीएम के आगे मजबूर युवाओं को मिला प्लेटफार्म, आमजन से जुड़े उठाए मुद्दे, इसलिए चंद दिनों में डेढ़ करोड़ हुए फॉलोअर्स
शिवपुरी से सैमुअल दास::
यदि घर में कॉकरोच दिख जाए तो महिलाएं परेशान हो जाती हैं, और अब इस कीड़े ने देश के नेताओं की नींद उड़ा दी है। महज 3 दिन में जिस कॉकरोच जनता पार्टी के डेढ़ करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए, उसने यह तय कर दिया कि अब देश की जनता सरकारों और नेताओं से ऊब चुकी है। कॉकरोच का डर अब नेताओं के दिलों दिमाग में कुछ ऐसा समा गया है कि उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य खतरे में नजर आने लगा।
गौरतलब है कि दुनिया में सबसे जवान देश भारत है, जिसमें सबसे अधिक युवा वोटर्स हैं। इन युवाओं के दिलों दिमाग में वर्तमान राजनीति के खिलाफ आक्रोश है, लेकिन चुनाव में ईवीएम के खेल की वजह से वो खुद को असहाय महसूस कर रहे थे। इसी बीच चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने युवाओं को कॉकरोच कहकर न केवल एक नई बहस को जन्म दे दिया, बल्कि नई पार्टी का उदय भी करवा दिया। कॉकरोच जनता पार्टी बनते ही जब उसमें फॉलोअर्स का आंकड़ा 3 दिन में डेढ़ करोड़ के ऊपर पहुंचा, तो देश की प्रमुख पार्टियों के नेता बेचैन हो गए। बताते हैं कि आनन फानन में इस वेबसाइट को बंद करवा दिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि इतने कम समय में कॉकरोच पूरे देश की पसंद बन चुका था। अब हर कोई इस पार्टी से जुड़कर देश के नेताओं को आईना दिखाने को बेताब है।
इस नई नवेली सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना जो मैनिफेस्टो जारी किया है, उसमें दल बदलू नेताओं को 20 साल तक के लिए चुनाव से बाहर रखने की बात कही है। यदि ऐसा हुआ तो क्षेत्रीय सांसद जैसे नेता प्रदेश में जनता द्वारा चुनी गई सरकार को गिराकर अपने चंद नेताओं को कथित तौर पर करोड़ों रुपए की राशि दिलवाकर पार्टी नहीं बदल पाएंगे।
बेकाबू होते हालातों के बीच आया कॉकरोच::
देश के हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, जिससे सबसे अधिक युवा प्रभावित हुआ है। पहले तो हजारों करोड़ रुपए लेकर ललित मोदी, विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे कई व्यापारी देश छोड़कर भाग गए। उसके बाद सरकारी संस्थानों का निजीकरण करके चंद पूंजीपतियों के हाथ में महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंप दी गई। अंबानी व अडानी को देश के पर्यावरण से खिलवाड़ करने तथा हरियाली नष्ट करके फैक्ट्रियां खोलने की छूट दे दी गई। युवाओं को रोजगार तो दिया नहीं, बल्कि बेरोजगारों को कॉकरोच कहकर अपमानित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। देश के हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि अब ऐसा लगता है कि फकीर अपना थैला उठाकर विदेश चला जाएगा और देश पर चंद पूंजीपतियों का राज होगा।







