
युवाओं को अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए झेलनी पड़ी मार, शिक्षितों से संसद को बचाने की कवायद
नीट सहित अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक होने का विरोध करने वाले युवाओं पर पुलिस ने बरसाईं लाठियां व छोड़े अश्रु गैस के गोले
शिवपुरी से सैमुअल दास:
देश के युवाओं को जब अपना भविष्य नेताओं के हाथों के असुरक्षित नजर आया, तो वो देश की राजधानी की ओर कूच कर गए। जब युवाओं का सैलाब जंतर-मंतर पर एकजुट हुआ, तो नेताओं को अपनी कुर्सी खतरे में नजर आने लगी। बस फिर क्या था, युवाओं को डराने के लिए पुलिस का लाठी चार्ज एवं अश्रु गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए। जिससे युवाओं में अफरा- तफरी भले ही मची, लेकिन कोई भी जगह छोड़ने को तैयार नहीं था। युवाओं का जोश देखते हुए नेताओं की चिंता इतनी बढ़ गई कि उन्होंने संसद की सुरक्षा बढ़ा दी।
भारत दुनिया का वो एकमात्र देश है, जो सबसे युवा है, यानि सबसे अधिक युवा देश में मौजूद हैं। यह स्थिति तब है, जबकि लाखों की संख्या में योग्य युवा विदेशों में आईटी सेक्टर सहित अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे युवा देश में नेताओं ने अपने फायदे के लिए उनकी परीक्षाओं के पेपर लीक करवा कर अपना मुनाफ़ा कमाया। सरकार की अकर्मण्यता से दुखी होकर कई छात्र तो आत्महत्या भी कर चुके हैं। इतना सब होने के बाद भी सरकार ने अपने उस मंत्री को पद से नहीं हटाया, जो इसमें दोषी हैं। जिसके चलते युवाओं का नेतृत्व करने के लिए सोनम वांगचुक ने 20 दिन तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन किया। इसी बीच सरकार के निर्देशन में पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। गोदी मीडिया ने तो कुछ नहीं दिखाया, लेकिन सोशल मीडिया पर जब वीडियो वायरल हुईं तो देश का युवा खुद को दिल्ली जाने से रोक नहीं पाया। जब युवाओं की भीड़ दिल्ली में इकठ्ठा होना शुरू हुई, तो सरकार ने फिर पुलिस बल का दुरुपयोग किया। फिर भी जब बात नहीं बनी तो संसद की सुरक्षा बढ़ा दी।
इस घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश की संसद को शिक्षित युवाओं से खतरा है या फिर उन भ्रष्ट नेताओं से, जो देश को बेचने की कगार तक ले जा चुके हैं..??






