
चरनोई भूमि को निजी दर्ज कर नामांतरण करने वालों पर कलेक्टर ने दिए कार्यवाही के निर्देश
7 दिन में शासकीय दर्ज होगी भूमि: जिले में चरनोई हो जाए मुक्त तो आवारा मवेशी की समस्या से मिलेगी निजात
शिवपुरी। जमीन घोटालों के मामलों में सबसे आगे शिवपुरी जिले में चरनोई भूमि पर कब्जों का बड़ा खेल हुआ है। ऐसा ही एक मामला नरवर तहसील में सामने आने पर कलेक्टर ने उक्त भूमि को निजी से शासकीय दर्ज करने एवं नामांतरण करने वाले कर्मचारी-अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि जिले में चरनोई भूमि को ही कब्जामुक्त करा दिया जाए, तो आवारा मवेशियों की बड़ी समस्या दूर हो जाएगी।
शिवपुरी जिले की नरवर तहसील के ग्राम जैतपुर के सर्वे क्रमांक 1589 में 3.13 हेक्टेयर चरनोई भूमि दर्ज थी। इसमें से 0.51 हेक्टेयर भूमि वर्ष 2005 में व्यवस्थापन आदेश के जरिए मुनेश कुमार शर्मा के नाम दर्ज की गई थी। इसके बाद मुनेश कुमार ने यह भूमि वर्ष 2008 में किरण शर्मा को बेच दी, जबकि इस तरह की व्यवस्थापन भूमि को बेचने के लिए मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 के अंतर्गत कलेक्टर की अनुमति लेना जरूरी होता है। परन्तु बिना अनुमति के यह जमीन बेची गई थी। इस मामले को जांच में यह भी सामने आया कि विक्रय पत्र में लिखा गया था कि यह जमीन शासकीय पट्टे की नहीं है, जबकि राजस्व अभिलेख इसके विपरीत थे। इसके अलावा नामांतरण का आधार ग्राम पंचायत का ठहराव प्रस्ताव बताया गया जो पंचायत कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाया गया।
कलेक्टर न्यायालय ने इस मामले में अपना निर्णय लिया है। शासन से व्यवस्थापन में मिली जमीन को बिना कलेक्टर की अनुमति के बेचना कानून के विरुद्ध है। इसलिए सर्वे क्रमांक 1589/3 रकबा 0.51 हेक्टेयर भूमि को वापस शासकीय दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
जिले भर में चरनोई भूमि पर हो गए कब्जे:
शिवपुरी जिले की हर ग्राम पंचायत में मवेशियों के लिए शासकीय भूमि को चरनोई के रूप में छोड़ी गई थी। उक्त भूमि गांव में ही होने की वजह से उस गांव के मवेशियों को चरने के लिए जगह होने की वजह से मवेशी न तो खेतों में फसलों को नुकसान करते थे और ना ही सड़कों पर आवागमन बाधित करते थे। अब जबकि मवेशियों के हिस्से की चरनोई भूमि पर उस क्षेत्र के प्रभावशाली ने कब्जा कर लिया, तो यह मवेशी हाइवे पर इकठ्ठा होने लगे।




