
सोशल मीडिया ने हिला दिया, गोदी मीडिया को भी नहीं था अंदाजा कि ऐसी होगी फजीहत
आका के इशारे पर चलने वाली दिल्ली पुलिस को भी समझ आएगा बच्चों पर बर्बरता का परिणाम
शिवपुरी से सैमुअल दास::
समय बड़ा बलवान होता है। जब यह बदलता है तो अच्छे-अच्छे अर्श से फर्श पर आ जाते हैं। देश के युवा के आक्रोश को जिन नेताओं ने सोशल मीडिया का मुद्दा समझा, आज उनके तोते उड़े हुए हैं। उन्हें लगता था कि गोदी मीडिया हमारे साथ है तो सोशल मीडिया की नाराजगी दो दिन बाद खत्म हो जाएगी, लेकिन वो यह भूल गए कि देश की जनता के साथ- साथ युवाओं के सब्र का बांध अब टूटने पर है। बस इसी चूक ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोकर रख दिया, तथा देश के नेताओं की नींद उड़ा दी।
हर भारतीय के खाते में आएंगे 20 लाख रुपए, काला धन वापस आएगा, महंगाई कम होगी, हर वर्ष 2 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा, अच्छे दिन आएंगे, जैसे न जाने कितने जुमले बोलकर सत्ता में आए। कुर्सी पर विराजते ही सीबीआई, आईडी, चुनाव आयोग सहित महत्वपूर्ण एजेंसियों को अपना पिठ्ठू बनाकर मीडिया हाउस को खरीद लिया। फिर शुरू हुआ आमजन के शोषण और गोदी मीडिया के माध्यम से अपना गुणगान। स्थिति यह बनी कि देश के लोगों ने न्यूज चैनलों को देखना ही बंद कर दिया, क्योंकि उसमें भी अंधभक्ति के गीत हर समय सुनाई दे रहे थे। हमारे देश के नेता यह भूल गए कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, तथा जिस दिन युवा जागा तो फिर उनकी नींद उड़ा देगा। बस यही चूक उन्हें भारी पड़ गई। नीट का पेपर लीक हुआ, और उसे लीक करने वाला भी भाजपा नेता ही निकला था। युवाओं से परीक्षा के नाम पर मानसिक मेहनत करवाने के साथ अभिवावकों की जेब काटकर नेता जब अपनी जेब भरने लगे, तो फिर युवा इसे बर्दाश्त नहीं कर पाया। रही सही कसर चीफ जस्टिस ने युवाओं को कोकरोच कहकर पूरी कर दी। हालांकि जब कोकरोच जनता पार्टी के हर दिन लाखों फॉलोवर्स बढ़े तो राजनीति के जानकार समझ गए थे कि देश के आक्रोश को एक प्लेटफार्म मिल गया है, लेकिन हमारे देश के नेता गोदी मीडिया को कब्जे में करके अपने स्तुति गान करवाते रहे। युवाओं पर पुलिस की बर्बरता को देखकर हाईकोर्ट दिल्ली से लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील भी युवाओं का साथ देने मैदान में आ गए। बस फिर क्या था, नेताओं को आरामदायक गद्दों पर भी नींद नहीं आई।
अन्ना की जगह आए वांगचुक::
वर्ष 2014 में अन्ना हजारे ने जब दिल्ली में अनशन किया तो देश का माहौल बदल गया था। 12 साल बाद उसी दिल्ली में अन्ना की जगह वांगचुक ने धरना दिया। इधर रातोंरात दिल्ली के कमिश्नर बदले गए तथा पुलिस ने वांगचुक को परदेदारी में अनशन से उठाकर अस्पताल में भर्ती करवा दिया। अपने आका के इशारे पर दिल्ली पुलिस एक के बाद एक गलती करती गई, तथा सबसे बड़ी चूक 20 जुलाई को लाठीचार्ज करके पुलिस ने कर दी। छात्र-छात्राओं की बर्बरतापूर्ण पिटाई के वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो उसने हर युवा व अभिभावक को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। हालात ऐसे बिगड़े कि गुरुवार की रात 12 बजे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करना पड़ा।
गोदी मीडिया की फजीहत तय थी::
दिल्ली में 20 मार्च को हुए लाठीचार्ज ने जहां एक तरफ हर देशवासी को हिलाकर रख दिया था, तो वहीं सरकार का गुणगान करने वाली गोदी मीडिया आंदोलन करने वाले युवाओं को आतंकवादी घोषित करने का प्रयास कर रही थी। अपने हक की लड़ाई लड़ते हुए पुलिस के कील वाले डंडे खाकर लहूलुहान होने वाले युवाओं ने जब गोदी मीडिया की इस हरकत को देखा, तो फिर दिल्ली में मीडियाकर्मियों के साथ जो हुआ, वो तो होना ही था। मैं खुद लगभग सभी बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुका हूं, इसलिए मुझे पता है कि नेताओं के हाथों यह मीडिया हाउस कैसे बिक चुके हैं। अब इन्हें मीडिया या चौथा स्तंभ भी न कहकर सरकार के पार्टनर कहना ज्यादा उचित होगा।






