
तो फिर यह लोग हैं कौन?, जिन्हें पुराने भाजपा के लोग अपना मान नहीं रहे, कांग्रेस कह रही: सरेंडर होकर गिड़गिड़ाने पहुंचे
कभी रूठे पार्षदों को मनाने में ली प्रशासन की मदद, अब पानी दिलाने में लगा सरकारी अमला, टैंकर तो ले आए, पानी कहां से लाओगे..?
शिवपुरी जिला मुख्यालय पर इन दिनों गम्भीर जल संकट है। लोग पूरी-पूरी रात पानी के लिए न केवल जाग रहे हैं, बल्कि खाली कट्टियां लेकर पानी की तलाश में भटक रहे हैं। शहर के यह हालात उस नगरपालिका की वजह से हुए, जिसमें अंधाधुंध भ्रष्टाचार एवं आपसी घमासान चल रहा है। शहर की जनता पानी मांग रही है, नपा के जिम्मेदार यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि एक माह बाद मोटर आने पर ही सिंध की सप्लाई शुरू हो पाएगी।
इस बीच कुछ नेता कलेक्टर अर्पित वर्मा के पास गए, और व्यवस्था संभालने के लिए गिड़गिड़ाए (ऐसा मैं नहीं, कांग्रेस विधायक कह रहे हैं)। तीन दिन पहले जिन नेताओं का प्रशासन के साथ फोटो मीडिया में चला, उन्हें भाजपा के पुराने नेता ही अपना नहीं मान रहे, जबकि कांग्रेस उन्हें भाजपा के कर्णधार मान रही है। पानी के लिए हो रही नौटंकी में वो आरोपी छुप गया, जो शहर के ऐसे हालात बनाने के लिए जिम्मेदार है। इस शहर को एक बार फिर पानी के नाम पर नेताओं ने खुद को प्रचारित करने का एक सुअवसर मान लिया। टैंकर तो छोटे और बड़े ले आए, लेकिन उनमें भरने वाला पानी कहां से लाओगे..?
फोटो बना भाजपा में चिंगारी..
शहर में पानी की व्यवस्था न कर पाने के बाद नेता एक बार फिर प्रशासन के कंधों पर सवार हो गया। चूंकि सवाल शहर की प्यासी जनता का है, इसलिए पानी वितरण में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अपना अमला लगा दिया, और वार्ड बाँट दिए। भाजपा जिलाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों का पिछले दिनों छपे एक फोटो ने भाजपा में चिंगारी का काम किया है। पुराने भाजपाइयों की पूछ परख नहीं, और आयातित कांग्रेसी अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं। इस बात की सबसे अधिक नाराजगी रविवार को पीएम के मन की बात के बाद मन की भड़ास में सुनने को मिली।
शिवपुरी में पानी पर फिर राजनीति..
मध्यप्रदेश में शिवपुरी एकमात्र ऐसा शहर होगा, जहां की जनता पानी पिलाने का झूठा आश्वासन देने वाले को भी विधायक यह सोचकर बना देती है कि शायद सच बोल रहा है। पानी के नाम पर पिछले 30 साल से राजनीति हो रही है। वर्ष 2006 में पूरी सरकार के विरोध में लग जाने के बावजूद वीरेंद्र रघुवंशी ने वो चुनाव घर-घर निशुल्क पानी बांटकर जीता था। शहर में एक बार फिर पानी के हालात गंभीर हो गए, तथा शिवपुरी विकास में आगे बढ़ने की बजाए पीछे टैंकर युग में पहुंच गया। यह हालात तब हैं, जबकि क्षेत्र के सांसद शहर की जनता को अपना परिवार कहते हैं, तथा उनकी केंद्र में अच्छी चलने की बात उनके लोग कहते हैं, तो फिर प्रदेश में क्यों नहीं चल पा रही..?, पानी की मोटर बदलने में कितना समय लगेगा, जब एक केंद्रीय मंत्री ठान ले, व शहर की जनता को पानी पिलाना चाहते हों। टैंकर से समाधान नहीं है, क्योंकि टैंकरों का ढेर लगाने से क्या होगा?, जब उन्हें भरने के लिए ट्यूबेल ही नहीं होंगे।
रिचार्जिंग खत्म, दोहन लगातार, पानी रसातल में:
उल्टे कटोरे के समान बसी शिवपुरी में लोगों की बसाहट तभी की गई, जब यहां पर 18 तालाब बनाकर उन्हें नालों से इंटर कनेक्ट किया। तालाब लबालब होने से पूरे शहर के ट्यूबेल भी रिचार्ज होकर चंद फीट की गहराई में पानी उगलते थे, तथा उस समय गिने चुने बोर ही हुआ करते थे। वर्तमान में 18 में से 13 तालाबों का अस्तित्व खत्म हो गया, तथा मनियर का 14वाँ तालाब भी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। भूजल रिचार्जिंग के बड़े सेंटर खत्म होने व पानी रसातल में पहुंच जाने से गम्भीर संकट और बड़ा सवाल यह होगा कि छोटे/बड़े टैंकरों को भरने के लिए ट्यूबेल कहां हैं..?
अभी ईश्वर मेहरबान, भीषण गर्मी बाकी है
जून माह की आज से शुरुआत हो गई, तथा ईश्वर ने दया दिखाकर मौसम को बदल दिया, तो कूलर भी खाली नहीं हुए, और कुछ बचत पानी की हो गई, लेकिन मौसम खुलते ही गर्मी फिर अपना प्रचंड रूप दिखाएगी। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की मांग बढ़ेगी, जिससे टैंकर व्यवस्था इसलिए गड़बड़ाएगी, क्योंकि उन्हें भरने के लिए हाइड्रेंट ही नहीं होंगे। इससे बेहतर है कि मोटर पर फोकस किया जाए।







