
महंगाई ने कम कर दी किसान की आय, लागत बढ़ने से आधुनिक खेती में भी किसान का मुनाफा घटा
बारिश होने के साथ ही खेतों में बिछाई पॉलीथिन, छेद करके लगाएंगे टमाटर का पौधा, खरपतवार रुकेगी, नहीं होगी पानी की बर्बादी
शिवपुरी से सैमुअल दास::
हमारे देश में केंद्र से लेकर राज्य सरकार के मंत्री यह दावा करते नहीं थकते कि हमारी सरकार किसान हितैषी है, जबकि धरातल पर स्थिति विपरीत है। किसान आधुनिक खेती करके जो अच्छी पैदावार ले रहा है, उससे होने वाले किसान के लाभ को महंगाई ने काफी कम के दिया। महंगाई के इस तड़के से जब बड़े किसान प्रभावित हो रहे हैं, तो फिर छोटा किसान महंगाई की इस मार से कैसे बच सकता है। शिवपुरी जिले के पिपरसमा गांव में सर्वाधिक टमाटर का उत्पादन होता है। आज जब गांव के रास्ते में देखा तो हर तरफ खेत में पॉलीथिन बिछी हुई नजर आई। टमाटर लगाने के लिए किसान की इस तकनीक से उत्पादन तो बढ़ता ही है, साथ ही खरपतवार से फसल बची होने के साथ ही पानी की बर्बादी कम होने के साथ ही पौधे के आसपास पर्याप्त नमी बनी रहती है।
हमारा देश कृषि प्रधान होने के बावजूद हर तरफ से किसान का शोषण तो है ही, साथ ही फसलों की बुवाई में लागत कई गुना बढ़ गई। एक बीघा खेत में पॉलीथिन (मलचिंग) के तीन रोल लगते हैं, पहले एक रोल 1200 रुपए का आता था, अब 2 हजारे रुपए का एक रोल मिल रहा है। डीएपी का 1300 रुपए वाला कट्टा किसान ने 2500 रुपए में ब्लैक में खरीदा है। सरकार ने ऑनलाइन टोकन की बुकिंग में शिवपुरी के किसान को खनियाधाना एवं करेरा की दुकान से खाद मिलना तय कर दिया। जिसके चलते मजबूरी में किसान ने ब्लैक में खाद खरीदा है। एक बीघा खेत में पहले लागत 1 लाख रुपए लगने के बाद 2 से ढाई लाख का टमाटर निकलता था। अब लागत 1.25 लाख हो गई, जिसके चलते किसान की आय में कमी हो गई। किसान से लूट यहीं पर नहीं रुक रही, बल्कि मंडी में बिकने वाली प्याज या अन्य फसल में 2 किलो प्रति मन अधिक प्याज लेकर किसान को मिलने वाली राशि में से सीधे कटौती की जा रही है।
पॉलीथिन की क्यारी में लगते हैं टमाटर:
खेत में ऊंची क्यारी बनाकर पहले उसमें पानी के।लिए पाइप तथा उसके ऊपर पॉलीथिन बिछा दी जाती है। जिसमें छेद करके बाहर से मंगाया जाने वाला टमाटर का पौधा लगाया जाता है। अधिक बारिश का पौधे पर सीधा कोई असर नहीं होता है, तथा क्यारी से होकर अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है। पॉलीथिन के नीचे पौधे के आसपास खरपतवार उग ही नहीं पाता, तो उसे नष्ट करने की दवा भी नहीं छिड़कनी पड़ती। साथ में बांस और तार बांधकर पौधे को ऊंचा रखा जाता है, जिससे उत्पादन अच्छा होता है, तथा फल भी खराब नहीं होता।








