दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं की निर्मम पिटाई को देख हर युवा उनके सपोर्ट में आया
शिवपुरी। कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में दो छात्राएं एक आवेदन लेकर कलेक्टर अर्पित वर्मा के पास पहुंचीं। उनकी मांग थी कि दिल्ली में चल रहे कोकरोच जनता पार्टी के युवाओं को प्रोटेस्ट करने की परमीशन मांगी। छात्राओं ने बताया कि जिलाधीश ने उनका आवेदन यह कहते हुए वापस कर दिया कि इसके लिए एसडीएम के पास जाएं। महत्वपूर्ण बात यह है कि सोमवार को दिल्ली में जो कुछ हुआ, उसे देखकर हर अभिभावक की आंखें नम हो गईं, तो वहीं युवाओं में भी सरकार के नुमाइंदों के खिलाफ आक्रोश है।
नीट सहित अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक होने से युवा विद्यार्थियों में सरकार के मंत्रियों के खिलाफ नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली में जब रेलवे स्टेशन व अन्य स्थानों पर युवाओं को रोक दिया गया, बावजूद इसके युवाओं का इतना भारी भरकम हुजूम जंतर मंतर पर पहुंच गया कि हमारे देश के नेताओं को अपनी कुर्सी बचाने के लिए पुलिस से लाठीचार्ज करवाना पड़ा, अश्रु गैस के गोले फेंके गए तथा छात्र-छात्राओं को घसीटा गया। इतना ही नहीं संसद से प्रधानमंत्री अपने काफिले के साथ गुपचुप निकल गए, तथा संसद पर सशस्त्र बल बंदूक लेकर ऐसी पोजिशन में बैठ गए, मानों कोई आतंकवादी हमला होने वाला हो। विभिन्न न्यूज चैनलों एवं गोदी मीडिया ने भले ही सरकार की चाटुकारिता में इन विद्यार्थियों की ही गलती बताई हो, लेकिन सोशल मीडिया पर जब युवाओं पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियां चलाईं तो हर किसी के दिल में उन बच्चों के लिए प्रेम जाग गया, क्योंकि बच्चे तो सभी के हैं।
उस पूरे घटनाक्रम में बच्चे पुलिस की लाठियां खाते रहे, लेकिन किसी भी वीडियो में वो इस बर्बरता का प्रतिकार करते नजर नहीं आए। देश की राजधानी में इतना सब होने के बाद भी सरकार के रहमोकरम पर अपना जीवन गुजारने वालों ने इस पूरे घटनाक्रम को देशविरोधी बताने से भी कोई परहेज नहीं किया। ठीक है उनकी गुजर बसर सरकार की खुशामदगी करने से हो रही हो, लेकिन बच्चे तो उनके भी हैं, क्या इनका दिल उस रोती हुई छात्रा का वीडियो देखकर भी मन द्रवित नहीं हुआ, जो हाथ जोड़कर उस महिला पुलिसकर्मी से कह रही थी कि क्या आप अपने बच्चों को भी इसी तरह पीटती हो। लानत ऐसी चमचागिरी वाली जिंदगी से, जो सच देखकर भी उसे झुठलाने का प्रयास कर रहे हो।




