अपना सामान बेचने लिया कलेक्टर के नाम का सहारा, कुछ दिन पहले अभाविप नेता करवा रहा था ट्रांसफर
शिवपुरी। कलेक्टर की फेसबुक से शिवपुरी के लोगों को जब फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई, तो लोगों ने बिना देर किए दोस्ती स्वीकार कर ली। यह स्पीड इतनी तेज रही कि एक ही दिन में 1 हजार फालोअर्स भी बन गए। इसके बाद कलेक्टर के नाम की आईडी से जो मैसेज भेजा गया, उसने फर्जी आईडी की पोल खोल दी।
एक साइबर ठग ने अपना सामान बेचने के लिए शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा के नाम का सहारा लेते हुए उनके नाम की एक फर्जी आईडी बनाई, तथा शिवपुरी के लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर पहले अपना दोस्त बनाया। जब इस फेक आईडी पर दोस्तों की संख्या 1 हजार के ऊपर हो गई, तो फिर ठग अपने असल मकसद पर आया। उसने कलेक्टर की फर्जी आईडी से मेसेज किया कि मेरा एक दोस्त सीआरपीएफ में है, तथा उसका ट्रांसफर हो गया है, तो वो अपने घर का महज 3 महीने पुराना सामान बेचना चाहता है। सोफा, डबल बैड से लेकर अन्य सामान की कुल कीमत 90 हजार रुपए बताई गई। जिसमें गारंटी आदि भी अभी होने की बात कही गई।
शिवपुरी में जब यह मेसेज कई लोगों के पास पहुंचा, तो इस फर्जी आईडी की जानकारी कलेक्टर तक भी पहुंची। अब इस मामले की जांच पुलिस कर रही है, यह आखिर कौन सा साइबर ठग है, जिसने सामान ठिकाने लगाने के लिए कलेक्टर के नाम की फर्जी आईडी बनाई। ज्ञात रहे कि बीते चार दिन पूर्व एक अभाविप नेता का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो कलेक्ट्रेट में खड़े होकर तहसीलदार को अपना पावर दिखाते हुए बोल रहा था कि कलेक्टर का एक फोन पर ट्रांसफर करवा दूंगा। जिस तरह से दैनिक भास्कर ने ट्रांसफर उद्योग का स्टिंग किया है, उससे लगता है कि शायद अभाविप नेता की ऐसे ही किसी बाबू से सेटिंग रही होगी।




