
जिस मेडिकल कॉलेज की बेहतर कार्यप्रणाली के सांसद ने कसीदे गढ़े, वो बांट रहा मौत, पीड़ित भटक रहे न्याय के लिए
जूनियर डॉक्टरों के भरोसे मेडिकल कॉलेज, सीनियर डॉक्टर शासन से पगार लेकर शहर के प्राइवेट अस्पतालों में दे रहे सेवाएं
डीन बोले: प्राइवेट प्रैक्टिस की रहती है परमीशन, ऑन कॉल रहते हैं डॉक्टर, बच्ची की मौत की वजह खून की कमी नहीं निमोनिया था
शिवपुरी। पिछले दिनों एक मैरिज गार्डन में आभार सभा आयोजित की गई थी, जिसमें क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की बेहतर कार्यप्रणाली के कसीदे गढ़े थे। जबकि उसके विपरीत यदि धरातल पर देखा जाए तो 2 दिन पहले एक मासूम बेटी की जान इसी मेडिकल कॉलेज में चली गई, तथा 46 दिन पूर्व एक प्रसूता ने भी इसमें दम तोड़ दिया। कोरोना संक्रमण काल में रिकॉर्ड मौतों का गवाह बना शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज अब सामान्य दिनों के भी मौत का बंटोना बांट रहा है। यह हालात इसलिए बने हुए हैं, क्योंकि मेडिकल कॉलेज जूनियर डॉक्टर्स के भरोसे है, तथा सीनियर डॉक्टर शासन से पगार लेकर प्राइवेट अस्पतालों में सेवाएं देने के साथ ऑपरेशन तक कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के डीन का कहना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस की परमीशन डॉक्टर्स को रहती है, तथा वो कॉल पर उपलब्ध रहते हैं। बच्ची की मौत का कारण उन्होंने खून की कमी न बताकर सीवियर निमोनिया बताया।
गौरतलब है कि वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव शिवपुरी-गुना संसदीय सीट का प्रमुख मुद्दा शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज था। क्योंकि उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद से उस समय के कांग्रेसी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया शिवपुरी में मेडिकल कॉलेज खुलने की परमीशन का पत्र लेकर आए थे, तथा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं (जिसमें वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी) ने यह कहकर सिंधिया का मखौल उड़ाया था कि कागज के टुकड़े पर मेडिकल कॉलेज कहीं बनता है क्या। आखिरकार उस समय सिंधिया चुनाव जीते और शिवपुरी में मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हुआ।
इस मेडिकल कॉलेज का अस्पताल वर्ष 2021 में कोरोना संक्रमण काल के दौरान आनन फानन में शुरू किया गया था। जिसमें नियमों की पाबंदी के बीच थोकबंद मौत इस मेडिकल कॉलेज में हुई थीं। मेडिकल कॉलेज शुरू होने से शिवपुरी में डॉक्टरों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन उन्होंने अपनी सेवाएं मेडिकल कॉलेज में देने की बजाए शहर में खोले गए प्राइवेट अस्पतालों में देना शुरू कर दिया। मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट न होने से दिल के मरीज आज भी ग्वालियर ही रेफर हो रहे हैं। सबसे बुरा हाल अस्थि रोग के मरीजों का है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन की वेटिंग एक माह बाद की चल रही है, जबकि मेडिकल कॉलेज के वो ही डॉक्टर अपने प्राइवेट अस्पताल में बिना देर किए ऑपरेशन कर रहे हैं। किसी भी प्राइवेट अस्पताल में यदि सरकारी डॉक्टर कोई ऑपरेशन करता है, तो उसकी परमीशन उसे लेनी होती है, ताकि ऑपरेशन के एवज में मिली राशि में से उससे इनकम टैक्स लिया जा सके। लेकिन शिवपुरी में ऐसी कोई भी परमीशन लिए बिना डॉ. शिखा जैन शहर के प्राइवेट अस्पताल सुखदेव हॉस्पिटल में सीजर डिलेवरी कर रही हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवपुरी के प्राइवेट अस्पतालों में होने वाले ऑपरेशन से पहले एनस्थीसिया देने वाला केवल जिला अस्पताल में है, लेकिन वो जिला अस्पताल से अधिक प्राइवेट अस्पतालों में मरीज बेहोश कर रहा है।
इसलिए सिंधिया ने की तारीफ:
बीते माह शिवपुरी में माधवराव सिंधिया संस्था एवं रोटरी क्लब के तत्वाधान में लगे मेगा हेल्थ कैंप में न केवल शिवपुरी जिले के संपूर्ण स्वास्थ्य अमले ने बल्कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों एवं स्टाफ ने पूरे मनोयोग से अपनी सेवाएं उसमें दी थीं। जिसके चलते हेल्थ कैंप में आई मरीजों की भीड़ ने रिकॉर्ड ही बनवा दिया। शायद यही वजह थी कि सिंधिया ने मेडिकल कॉलेज के स्टाफ की तारीफ की थी।
यह बोले मेडिकल कॉलेज के डीन:
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स ने प्राइवेट प्रैक्टिस की परमीशन ली है, तथा वो ऑन कॉल मौजूद रहते हैं। जूनियर डॉक्टर भी भविष्य के चिकित्सक हैं, तो उनकी भी ड्यूटी लगती है। जिस एक माह की बच्ची की मौत हुई, उसे खून की कमी नहीं थी, बल्कि निमोनिया की वजह से वो बहुत अधिक बीमार थी। एक माह के बच्चे को वैसे भी खून की आवश्यकता उतनी नहीं होती।
डॉ. डी परमहंस, डीन मेडिकल कॉलेज शिवपुरी









