
अधीनस्थ अमला भी अलर्ट मोड में, तो सही शिकायत का निराकरण होना तय, मौके पर ही मदद मिलने से उत्साहित शिकायतकर्ता
शिवपुरी। शिकायती आवेदन लेकर आफिसों के चक्कर लगा रहे वास्तविक पीड़ित की बात यदि जिले का मुखिया पास में कुर्सी पर बिठाकर सुन ले, तो यकीन मानिए कि उसका आधा दर्द दूर हो जाता है। शायद यही वजह है कि बीते मंगलवार को कलेक्ट्रेट में हुई जनसुनवाई में 400 आवेदन आए। इन सबके बीच अधीनस्थ अमला भी अलर्ट मोड में होने से सही शिकायत का निराकरण भी हो पा रहा है, ऐसा माना जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जब शिकायत सुनते समय जिलाधीश बातचीत भी कर रहे हैं, तो वो आवेदन कम हो गए, जो शिवपुरी घूमने आते समय शिकायत करने का चलन शुरू हो गया था।
गौरतलब है कि शिवपुरी कलेक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई में आवेदन लेकर आने वाले को कलेक्टर अर्पित वर्मा अपने बराबर से कुर्सी पर बिठाकर उसकी शिकायत सुनते हैं। इसके बाद वो संबंधित विभाग की तरफ शिकायत को मार्क करके पहुंचा देते हैं। इस दौरान यदि कोई बहुत ज्यादा जरूरतमंद आता है, तो उसे मौके पर ही मदद भी की जा रही है। चूंकि कलेक्टर के इस पैटर्न को एक माह से अधिक समय हो गया, तथा माउथ पब्लिसिटी की गति सबसे तेज होती है, इसलिए जनसुनवाई में आवेदनों का आंकड़ा 400 तक पहुंच गया।
गगन को भी आस: मृत पत्नी को मिलेगा न्याय:
सर्वोदय नगर कॉलोनी शिवपुरी निवासी गगन अग्रवाल ने शासकीय डॉक्टर के निजी अस्पताल से कनेक्शन एवं लापरवाही से हुई अपनी पत्नी की मौत की शिकायत मंगलवार को कलेक्टर अर्पित वर्मा से की। शिकायत में गगन ने उल्लेख किया है कि उनकी पत्नी निधि अग्रवाल को तीसरा गर्भ ठहरने पर 22 अगस्त 2025 से मेडिकल कॉलेज की डॉ. शिखा जैन का ट्रीटमेंट चल रहा था। डॉ. शिखा निजी अस्पताल सुखदेव हॉस्पिटल में सेवाएं देती है, इसलिए 28 मार्च 2026 को प्रसव के लिए निधि को सुखदेव हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, तथा सुबह 8:40 बजे सिजेरियन डिलीवरी हुई। उसके बाद डॉ. शिखा चली गईं, जबकि निधि को ब्लीडिंग व यूरिन न होने की समस्या होती रही। कई बार बुलाने पर भी डॉ. शिखा नहीं आईं, तथा देर शाम 7:45 बजे आकृत देखने के बाद बोलीं कि यह तो सामान्य समस्या है। लगभग 12 घंटे तक डॉक्टर का विजिट न होने से निधि की किडनी फेल होने लगी। हालत बिगड़ने पर रात्रि 2:30 बजे निधि को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट कराया, जहां लगभग 4 घंटे बाद निधि ने दम तोड़ दिया। इसमें महिला डॉक्टर की बड़ी लापरवाही तथा सरकारी डॉक्टरों का प्राइवेट अस्पतालों से कनेक्शन भी उजागर हुआ है। गगन अपनी दो बेटियों के साथ कलेक्टर से मिलने गए, तथा अर्पित वर्मा ने उनकी बात को ध्यान से सुना भी है। गगन को उम्मीद है कि अब कोई और महिला इस तरह लापरवाही का शिकार न हो, तथा दोषियों पर कार्यवाही की जाए।








