
सिद्ध स्थल बगीचा सरकार पर हुए विवाद में नया मोड़: सुबह भोला के परिजनों ने जताया मंदिर पर कब्जा, दोपहर में पहुंचे विधायक प्रीतम
पिछोर विधायक बोले: मंदिर किसी के डैडी का नहीं है, अभी हिंदी में समझा रहा हूं, फिर अंग्रेजी में समझना भी आता है
आस्था के केंद्र को चंद लालची लोगों ने बनाया लड़ाई का अखाड़ा, जहां कसम खाकर लोग झूठ नहीं बोलते थे, वहां चल रहीं लाठियां
शिवपुरी। जिले की करेरा तहसील में स्थित सिद्ध स्थल बगीचा सरकार पर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार की सुबह भोला पंडित के परिवार की महिलाओं ने मंदिर परिसर में पहुंचकर न केवल हंगामा किया, बल्कि तालाबंदी की नौबत तक आ गई। बाद में पुलिस ने आकर मोर्चा संभाला। देर दोपहर पिछोर विधायक प्रीतम लोधी अपने लाव लश्कर के साथ मंदिर पहुंचे। प्रीतम ने दो टूक कहा कि यह मंदिर किसी के डैडी का नहीं है, यहां संत रहते हैं, और वो ही रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी मैं हिंदी में समझा रहा हूं, फिर मुझे अंग्रेजी में समझाना भी आता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस सिद्ध स्थल पर कभी लोग कसम खाकर झूठ नहीं बोलते थे, उस जगह पर चंद लालची लोगों की वजह से लाठियां चल रही हैं।
गौरतलब है कि बीते 9 मई शनिवार की रात करेरा का भोला पंडित अपने कुछ साथियों के साथ मंदिर में पहुंचा, तो यहां मौजूद साधु संतों के अलावा अन्य भक्तगणों ने विरोध किया। जिसमें भोला व उसके साथियों पर पलटवार भारी पड़ गया, और सिद्ध स्थल पर खून बह गया। भोला अभी अस्पताल में उपचार करा रहा है, तथा उसकी शिकायत पर करेरा थाना पुलिस ने मंदिर के पुजारियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। आज मंगलवार होने की वजह से मंदिर में भक्तों की भीड़ थी, तभी भोला के परिवार की महिलाओं ने मंदिर पर जाकर हंगामा कर दिया। जब विवाद अधिक बढ़ गया, तब पुलिस ने मंदिर पहुंचकर मामला शांत कराया।
फिर पिक्चर में आए प्रीतम::
सुबह मंदिर परिसर में हुए हंगामे की खबर संभवतः पिछोर विधायक प्रीतम लोधी तक पहुंची, तो वो भी अपने फौज फाटे के साथ देर दोपहर मंदिर पहुंच गए। जहां पर उन्होंने पहले संतों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। फिर कहा कि यह सिद्ध स्थल है, जिस पर साधु संतों का ही ठिकाना रहेगा, यदि किसी और ने अपना दावा पेश किया, तो फिर मैं अपने अंदाज में उसे समझाऊंगा। प्रीतम ने कहा कि मैं इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचाऊंगा। उन्होंने साधु संतों को आश्वस्त किया कि वो चिंता न करें, मैं उनके साथ हूं। प्रीतम ने कहा कि अंग्रेजी में कहते हैं न कि टिट फॉर टेट, तो मैं वो भी जानता हूं।
कौन है भोला पंडित..?
भोला पंडित पहले कोई काम नहीं करता था, तथा उसके खिलाफ वर्ष 2011 से 2018 तक जुआ एवं मारपीट के 7 मामले करेरा थाने में दर्ज हुए। उसके बाद वो जमीन कारोबार में उतर आया, तो इतना पैसा कमाया कि बगीचा सरकार मंदिर परिसर में बनाए गए राम जानकी मंदिर में सबसे अधिक चंदा देने के बाद मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा में यजमान भी बन गया। पिछले महीनों में भोला पंडित के नाम से एक फेक आईडी बनाकर किसी ने करेरा नगर के नामी गिरामी लोगों के नाजायज रिश्तों की कलई खोली, जिसमें भोला के खिलाफ भी कई पोस्ट डाली गईं।
विवाद की वजह: मंदिर पर मालिकाना हक
बगीचा सरकार परिसर में ही राम जानकी मंदिर बनाया गया, जिसमें सबसे अधिक चंदा देने के बाद अब उस मंदिर पर भोला पंडित अपना हक जमाना चाहता है। जबकि बगीचा सरकार के साधु संतों ने उस मंदिर में अखाड़े के साधु तैनात कर दिए हैं। अभी तक मालिकाना हक का विवाद गुपचुप तरीके से चल रहा था, लेकिन साधु संत भी 9 मई के होने वाले हमले को समझ रहे थे, इसलिए वो भी तैयारी के साथ थे। यही वजह है कि भोला पंडित का दांव उल्टा पड़ गया, और खुद अपने साथियों के साथ अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
प्राचीन सिद्ध स्थल की बहुत बड़ी मान्यता::
मैने पत्रकारिता की शुरुआत नवभारत से की है, और उस समय बगीचा सरकार की कई खबरें छापी थीं। एक समय हुआ करता था कि लोग किसी भी तरह के विवाद को सुलझाने पुलिस थाने न जाकर बगीचा सरकार पर जाते थे। वहां पर कसम खाने के बाद यह माना जाता था कि व्यक्ति सही बोल रहा है। इतना ही नहीं, कुछ उदाहरण भी खबर में देते थे कि जिसने झूठी कसम खाई, उसका कितना बुरा हुआ। आस्था का इतना बड़ा केंद्र आज चंद लालची लोगों की वजह से युद्ध का अखाड़ा बन गया है।








