
सिलारपुर में विस्फोट से उड़े पत्थर, हाइवे पर लगाया जाम, क्रेशर हुई सील, एसडीएम का हुआ ट्रांसफर
सिसोदिया की क्रेशर में भाजपा जिलाध्यक्ष की साझेदारी, यदि राजनीतिक प्रेशर में लिया स्टेप, तो प्रशासन में जाएगा गलत संदेश
शिवपुरी। बीते मंगलवार की देर शाम गुस्साए ग्रामीणों ने कोटा-झांसी फोरलेन हाइवे पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों की नाराजगी क्रेशर के लिए होने वाले विस्फोट से उड़े पत्थरों ने उनकी जान को खतरे में डाल दिया था। लगभग डेढ़ घंटे तक चले जाम को खुलवाने के लिए एसडीएम ने क्रेशर सील कर दी थी। चर्चा है कि उक्त क्रेशर में भाजपा जिलाध्यक्ष की साझेदारी है, जिसके चलते बुधवार की सुबह करेरा एसडीएम अनुराग निगवाल को जिला मुख्यालय अटैच कर दिया गया। यदि ऐसा है, तो प्रशासनिक अमले में यह संदेश गलत जाएगा।
शिवपुरी जिले की करेरा तहसील का ग्राम सिलानगर हाइवे किनारे बसा हुआ है। जिसमें मंगलवार की शाम हुए पत्थर तोड़ने वाले विस्फोट में बड़े बड़े पत्थर हवा में उड़कर ग्रामीणों के घर तक आए थे। गुस्साए ग्रामीणों ने घर के बाहर स्थित हाइवे पर जाम लगा दिया। उनकी मांग थी कि इस क्रेशर को बंद किया जाए। मौके की नजाकत को देखते हुए एसडीएम निगवाल ने मौके पर जाकर लोगों को समझाया तथा क्रेशर को सील कर दिया। चूंकि क्रेशर का पट्टा चंद्रभान सिंह सिसोदिया के नाम से है, लेकिन बताते हैं कि इसमें संरक्षण भाजपा जिलाध्यक्ष का है।
रात में हुई इस कार्यवाही के बाद बुधवार की सुबह कलेक्टर अर्पित वर्मा ने एक आदेश जारी किया, जिसमें करेरा एसडीएम निगवाल को कलेक्ट्रेट में अटैच करके पोहरी एसडीएम रहे अनुपम शर्मा को करेरा एसडीएम एवं कलेक्ट्रेट में समय गुजार रहे जेपी गुप्ता को पोहरी एसडीएम बना दिया। इस पूरे घटनाक्रम में शिवपुरी का एक दलाल शख्स भी पूरी तरह से सक्रिय रहा था, जो क्रेशर वाले पर लेनदेन का दवाब बनाने का प्रयास कर रहा था। खैर सच्चाई जो भी हो, लेकिन नेताओं के दवाब में अधिकारियों की उठापटक होगी, तो फिर जिले में अच्छी प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बन पाएगी।
पट्टेधारियों की आड में नेताओं का कब्जा::
शिवपुरी में पट्टेधारियों की आड में सत्ताधारी नेताओं का जमीनों एवं दूसरे कारोबार पर कब्जा, कोई नई बात नहीं है। सतनबाडा वन रेंज में नयागांव के पास भी एक आदिवासी परिवार के पट्टे की आड में कोलारस के सत्ताधारी नेताओं ने लगभग 300 बीघा फॉरेस्ट की जमीन पर अपनी फेंसिंग करवा दी है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश सभी कमिश्नर एवं कलेक्टरों को जारी हुए हैं कि फॉरेस्ट की जमीन पर किसी का आधिपत्य नहीं माना जाएगा, तथा यदि ऐसा है तो उसे हटाया जाए। शिवपुरी के नेताओं के प्रभाव के आगे प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन भी नहीं करवा पा रहा।






