
करेरा के बगीचा सरकार पर भोला पंडित लड़के लेकर पहुंचा, बाबा व समर्थकों ने खदेड़ा, वीडियो हुआ वायरल
अधिक चंदा देकर जता रहा था मालिकाना हक, दूसरा पक्ष भी था तैयारी में, पहुंचा दिया अस्पताल, सिर व हाथ-पेर में आईं चोट
शिवपुरी। शनिवार की रात एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें करेरा के सिद्ध स्थल बगीचा सरकार पर भोला पंडित अपने कुछ साथियों के साथ पहुंचा। यहां पर साधु संत और उनके समर्थकों ने एकजुट होकर भोला की टीम को खदेड़ कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। सूत्रों की मानें तो यह विवाद सिद्ध स्थल पर कब्जे को लेकर चल रहा है, क्योंकि राम जानकी मंदिर निर्माण में भोला ने कथित तौर पर 21 लाख का चंदा दिया था। इस तरह के विवाद की सुगबुगाहट पहले से थी, इसलिए दूसरा पक्ष भी तैयारी में था, शायद इसलिए भोला पंडित सहित तीन लोग अस्पताल पहुंचा दिए।
शिवपुरी जिले में करेरा की इन दिनों धूम मची हुई है। आईपीएल सट्टा से लेकर रात को घर पर हमला करके महिला व मासूम का अपहरण करने वाला आरोपी भी करेरा का ही है। अभी यह मामले सुलझ भी नहीं पाए थे कि शनिवार की रात को करेरा बगीचा सरकार का एक और वीडियो वायरल हो गया। जिसमें भोला पंडित अपने कुछ साथियों के साथ पहुंचा, तथा वहां मौजूद साधु संतों से उलझने लगा। उधर साधुओं के साथ उनके भी कुछ समर्थक मौजूद थे, जिन्होंने भोला की टीम पर पलटवार कर दिया। इतना ही नहीं आने वाले लोगों के डंडे आदि भी छीन लिए। सूत्रों का कहना है कि सिद्ध स्थल के एक हिस्से में मंदिर बनवाकर उसमें मूर्तियों की स्थापना में भोला पंडित एंड कंपनी ने बड़ा चंदा दिया था। उसके बाद से वो इस स्थल पर अपना अधिकार जमाने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में बीती रात को भी एक प्रयास किया गया, जिसे साधु संतों व नगर के अन्य लोगों ने विफल करते हुए, उल्टे पांव लौटने पर मजबूर कर दिया।
ज्ञात रहे कि भोला पंडित पिछले दिनों उस समय चर्चा में आया था, जब उसके नाम की फेक आईडी से करेरा कस्बे में रहने वाले लोगों के बारे में कई छुपे हुए राजों को उजागर करने के साथ बहुत ही अश्लील कमेंट करते हुए भोला पंडित के बारे में भी बहुत उल्टा सीधा लिखा था। वो मामला भी रफा दफा हो गया था। आज रात हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर करेरा को चर्चा में ला दिया।
रात में करेरा अस्पताल पहुंचने वालों में भोला पंडित, उसका भाई मनीष एवं कालीचरण बताए जा रहे हैं। भोला के सिर व हाथ पैरों में चोट आई हैं। इस पूरे मामले को देखकर पीके फिल्म की याद ताजा हो गई, पहले थोड़ा इन्वेस्टमेंट, उसके बाद फिर बेनिफिट ही बेनिफिट। शायद बगीचा सरकार में चंदा भी यही सोचकर दिया था, लेकिन यहां लाभ होने की बजाए अस्पताल जाना पड़ा।







