
गए थे यात्री बस से, तो वापस भी उसी से आ जाते, भाजपा नेताओं की राह पर प्रशासन
शहर के मुद्दे अनसुलझे, गांव की समस्याओं को दूर करने पहुंच रहे अधिकारी-कर्मचारी, चलो बरसों पुराने काम तो हो रहे
शिवपुरी। बीते रोज शिवपुरी का प्रशासनिक अमला यात्री बस में सवार होकर गोरा टीला गांव पहुंचा। रात में ग्रामीणों की समस्याओं को सुना, कई समस्याओं का निराकरण भी किया, फिर लौटते समय यात्री बस चली गई, तो अधिकारी अपने निजी चार पहिया वाहनों से वापस आए। अब इसमें यदि डीजल के खर्चे का गणित लगाएं, तो साहब को लेने शिवपुरी से खाली गाड़ी गई, लेकिन डीजल तो आने- जाने का उतना ही खर्च हो गया। इसे क्या मानें..?, क्या भाजपा नेताओं की डीजल-पेट्रोल बचाने की चलने वाली वीडियो की तर्ज पर अब प्रशासन भी चल निकला है..!
शिवपुरी शहर में ही यदि लोगोंं से जुड़ी समस्याओं की बात करें तो जिला सहकारी बैंक में हुए 100 करोड़ के घोटाले से हजारों परिवार अपना जमा पैसा न निकलने की वजह से परेशान हैं। इस घोटाले को अंजाम देने वाले एकाउंटेंट बने प्यून राकेश पाराशर की करोड़ो की संपत्ति के साथ आधा सैकड़ा से अधिक यात्री बसों की खरीदारी भी पाराशर ने जनता के उसी पैसे से की थी। चंद यात्री बसों को कोलारस थाने में खड़ा करके बाकी बसों की वापसी के प्रयास न तो पुलिस ने किए और ना ही परिवहन विभाग ने। जिसके चलते घोटालेबाज से रिकवरी न हो पाने की वजह से हजारों लोगों की करोड़ों की राशि बैंक में फंसी है, और लोग पैसा होते हुए भी बीमारी में इलाज व बच्चों की शादी नहीं कर पा रहे।
शिवपुरी का प्राचीन सिद्धेश्वर मेला भी विवादों में घिरने से उसमें तालाबंदी तो कभी ठेकेदार द्वारा गुप्त रास्ते से लोगों को अंदर पहुंचाया जा रहा है। आम आदमी तो मेला घूमने आया है, उसे ठेकेदार व प्रशासन की खींचतान से क्या लेना देना..?। चूंकि गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्यवाही नहीं होती तथा नपा की जिम्मेदार की नीयत भी साफ नहींं है, इसलिए इस तरह मामले उलझते हैं।
पिपरसमा कृषि उपज मंडी में प्याज बेचने के लिए कई दिनों से इंतजार कर रहे किसान की सुनने वाला कोई नहीं है। जबकि आस्मान पर छाए बादल अन्नदाता की चिंता को बढ़ा रहे हैं, क्योंकि पानी लगते ही प्याज बेकार हो जाएगी। हम यह नहीं कह रहे कि गांव में चौपाल लगाकर समस्याएं निपटाना ठीक नहीं है, लेकिन शहर सहित जिले की जो बड़ी समस्याएं हैं, उनका उचित निराकरण करना भी प्राथमिकता में रखना चाहिए।





