
भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात नपा शिवपुरी: चंद दिनों में बहुत कुछ बदला, काश! शहर भी बदल जाता
सीएमओ को रात में किया रिलीव, एकाउंटेंट को अंधेरे में घेरा, पार्षदों की पूछ परख बढ़ी, बदलाव के बाद भी कई सवाल..
शिवपुरी। शहर को संवारने की जिम्मेदारी संभालने वाली नगरपालिका शिवपुरी में लगभग 4 साल जमकर भ्रष्टाचार हुआ। जिसे जहां से मौका मिला, उसने जेब भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन चंद दिनों में बहुत कुछ बदल गया। सीएमओ को रात में रिलीव कर दिया, एकाउंटेंट को अंधेरे में पकड़कर धमकाया, पार्षदों की एकाएक पूछ परख बढ़ गई, तथा नगर की प्रथम नागरिक के बदलाव की चर्चाएं तेज हो गईं।
शिवपुरी नगरपालिका में पिछले 60 घंटों में बहुत कुछ बदल गया। इस बदलाव की शुरुआत प्रदेश की राजधानी यानि भोपाल से आया सीएमओ के ट्रांसफर आदेश से हुई। रात में नपाध्यक्ष का दफ्तर खुला, अनुभवी कर्मचारियों को बुलाया, और रातोंरात सीएमओ को रिलीव कर दिया। इस बीच नपा एकाउंटेंट रविकांत झा को भी बुलाया, जिसे एक संविदाकर्मी गिरेबान पकड़कर अंधेरे में ले गया। शनिवार की सुबह तो क्या शाम तक एकाउंटेंट भी कुछ बोलने से बचता रहा, क्योंकि संविदाकर्मी ने यह व्यवहार किसी के आदेश पर किया था। अध्यक्ष व सीएमओ का जो पार्षद विरोध कर रहे थे, उनसे जो भाजपा जिलाध्यक्ष सीधे मुंह बात नहीं कर रहे थे, उनका एकाएक हृदय परिवर्तन हुआ, तथा रविवार की दोपहर उन पार्षदों के साथ गोपनीय बैठक की, जिसमें नपाध्यक्ष को नहीं बुलाया। दिन में बैठक करके रात में ही पार्षदों को दिल्ली रवाना कर दिया गया। सोमवार को दिल्ली में क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्षदों को डेढ़ घंटे का समय देकर उनकी सुनी और अपनी सुनाई। इस बार यह बाध्यता नहीं थी कि महिला पार्षद के पति से बात नहीं होगी, इस बार सभी को आमंत्रण था। दिल्ली की बैठक से जो बात छनकर आई, उसमें नगर की प्रथम नागरिक की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा।
एकाएक कर्मचारी हुए लामबंद:
भोपाल से होने वाली कार्यवाही की भनक नपा के कर्मचारियों को भी लग गई, इसलिए जो एकाउंटेंट 48 घंटे तक चुप्पी साधे हुए था, वो आज कर्मचारियों के साथ कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने पहुंच गया। इसका यह भी मतलब निकाला जा रहा है कि कर्मचारी भी अब उस शख्स से नहीं डर रहे, जिसके इशारे पर एकाउंटेंट के साथ अभद्रता हुई।
अब यह हैं बड़े सवाल:

- अगर नपाध्यक्ष को पद से हटाया, तो न्यायालय से स्टे का दरवाजा खुला है।
- यदि नपाध्यक्ष के वित्तीय अधिकार छीने, तो वो भी श्योपुर की तरह हाईकोर्ट से वापस ले आएंगी।
- अपने कुछ नजदीकियों के साथ कांग्रेसी पार्षदों के साथ गठबंधन भी कर सकती हैं।
- चूंकि समय भी अब अधिक नहीं बचा है, इसलिए किसी के प्रति वफादारी की उम्मीद भी कम ही है।
- भ्रष्टाचार के मामलों में हुई प्रशासनिक जांच में दोषी साबित होने के मामले में कार्यवाही हो सकती है।



