नेशनल पार्क प्रबंधन ने ओवरफ्लो के बाद जलकुंभी बाहर जाने के फेर में रोक दी थी सफाई
शिवपुरी। इस बार मानसून की बेरुखी के चलते एक तरफ आमजन को उमस भरी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही, तो वहीं घसारही तालाब की तलहटी भी नजर आने लगी। कभी पानी ले लबालब रहने वाले इस तालाब में अब हर तरफ जलकुंभी से अधिक हरी घास नजर आ रही है। यह हालात इसलिए भी बने, क्योंकि तालाब के पानी को जलकुंभी ने सोख लिया, अब तालाब के मैदान में घास की खेती नजर आ रही है।
गौरतलब है कि पौने 2 करोड़ रुपए की मशीन नेशनल पार्क प्रबंधन को जलकुंभी निकालने की मशीन उपलब्ध करवाई गई थी। जिसके संचालन में बड़ी राशि फ्यूल में खर्च करने के बावजूद जब जलकुंभी साफ नहीं हुई तो प्रबंधन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जब यह तालाब ओवरफ्लो होगा, तो जलकुंभी दीवार के उस पार जाकर स्वतः ही खत्म हो जाएगी। अधिकारियों की इस प्लानिंग पर बारिश न होने से पानी फिर गया। अब स्थिति यह है कि पानी से लबालब रहने वाला तालाब अब हरा-भरा खेत की तरह नजर आने लगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि तालाब में अब जलकुंभी से अधिक घास दिखने लगी है।
तालाब की खत्म हो गई गहराई:
भूमाफिया से शेष बचे तालाबों की बरसों से सफाई न होने से उनकी गहराई भी अब खत्म हो गई है। शिवपुरी शहर के नालों के साथ जाने वाली गंदगी ने तालाबों के अंदर जमा होकर उनकी गहराई को खत्म कर दिया। रही सही कसर को जलकुंभी ने पूरा कर दिया, क्योंकि यह जल खरपतवार पानी से ही हरी भरी रहती है, तथा बहुत तेजी से पानी को सोखती है। जिसके चलते तालाब की तलहटी भी नजर आने लगी।

