
शहर विकास में नपाध्यक्ष का साथ देने जो प्रशासनिक 4 अधिकारी बदले, सब कुछ न कुछ करके हुए रवाना
शिवपुरी विजन को पूरा करने में प्रशासन के अधिकारी बनेंगे मददगार, सीएमओ तो विवादों के बीच हिस्सा लेकर गए
शिवपुरी। नगरपालिका एक स्वायत्ती संस्था है, जिसमें पार्षद एवं नपाध्यक्ष का चुनाव जनता ही करती है। इसमें शासन की ओर से सीएमओ के रूप में एक अधिकारी नियुक्त किया जाता है, जो परिषद के साथ मिलकर शहर की जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग करता है।
वर्तमान परिषद के समय में 4 सीएमओ बदल गए। शुरुआत में नपा एचओ एवं प्रभारी सीएमओ गोविंद भार्गव रहे। इसके बाद शैलेष अवस्थी रहे, जिन्हें तत्कालीन सीएम ने मंच से निलंबित कर हटाया था। उसके बाद सीएमओ केशव सगर आए, उनके और नपाध्यक्ष के बीच सड़कों पर विवाद हुआ। उनके जाने के बाद नपा का पूरा स्टाफ एक-एक लाख के काम की फाइलें ढूंढने में व्यस्त हो गया। उसके बाद आए शिवपुरी शहर में पले-बढे इशांक सीएमओ बने, तो ऐसा लगा कि शहर में कुछ अच्छे बदलाव होंगे। पार्किंग से लेकर मेले जैसे आरोपों के बीच लोकायुक्त में सह आरोपी बनने के बाद जब ट्रांसफर हुआ तो नपाध्यक्ष इतनी उत्साहित हुईं कि रात में ही रिलीव कर दिया।
नपा परिषद का लगभग 4 वर्ष कार्यकाल गुजरने के बाद शहर की जनता को विकास के काम दिखना तो दूर, पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भीषण गर्मी में तरसना पड़ा। नपा के जिम्मेदार आपस में ही उलझते रहे, तथा एक-दूसरे को कुर्सी से हटाने की लड़ाई तो एक साल से चल रही है। वर्तमान परिषद की मुखिया का चुनाव पार्षदों ने किया था, लेकिन अब आने वाले समय में अध्यक्ष का चुनाव जनता करेगी। यदि सच पूछा जाए तो पिछले दस साल में यह शहर बहुत पीछे चला गया, जिसे पटरी पर लाने में समय लगेगा।
अब प्रशासन बना सहयोगी:
सीएमओ की जगह अब प्रशासन के अधिकारी नगरपालिका में मददगार बने हुए हैं। पहले शिवपुरी एसडीएम आनंद सिंह राजावत को प्रभार दिया गया, जो अब नायब तहसीलदार को दिया गया है।
पार्षदों का फ्यूचर प्लान हुआ चौपट::
राजनीति की सबसे पहली सीढ़ी पार्षद है, और जब वो अपने कार्यकाल में वार्ड या शहर में काम नहीं कर पाता, तो उसका पॉलिटिकल फ्यूचर ही दांव पर लग जाता है। इस बार अधिकांश पार्षद अपने वार्ड में जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं दे पाए, जिसका मलाल उन्हें भी है।






