सरकारी स्कूल हो रहे बंद, प्राइवेट स्कूलों की आई बाढ़, नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे निजी स्कूल
शिवपुरी। शिक्षा अब कारोबार बन गई, और शिक्षा विभाग के लोग उस कारोबार में मददगार बन गए। शासन का एक बड़ा बजट शिक्षा पर खर्च किया जाता है, तथा एक शासकीय शिक्षक के वेतन में प्राइवेट स्कूल के तीन शिक्षक अपना बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं। हर साल शिक्षा विभाग नए खुलने वाले निजी स्कूलों का निरीक्षण इसलिए करवाता है, ताकि यह पता चल सके कि उस बिल्डिंग में बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।
शिवपुरी ब्लॉक में बीआरसीसी ने निरीक्षण करने के बाद यह पाया कि 25 प्राइवेट स्कूलों में दी गईं आवश्यक पात्रता पूर्ण नहीं है, इसलिए उनको मान्यता न दी जाए। हालांकि शिक्षा विभाग में नेगेटिव व पॉजिटिव रिपोर्ट के भी दाम तय हैं, फिर भी कोई अपनी नौकरी को दांव पर लगाकर रिपोर्ट नहीं देगा, ऐसा मेरा मानना है। बीआरसीसी ने जिन स्कूलों की नेगेटिव रिपोर्ट दी, उन्हें डीपीसी कार्यालय में पात्र मानते हुए स्वीकृति दे दी गई।
जब इस संबंध में डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार से बात की, तो उन्होंने बताया कि पहले विभाग ने यह नियम बनाया था कि जिसके पास अपनी जमीन नहीं है, या फिर बिना रजिस्टर्ड किराए की बिल्डिंग है, तो उसमें स्कूल नहीं चलेगा। उस समय प्राइवेट स्कूल वालों ने भोपाल में प्रदर्शन किया तो सरकार ने समझौता करके नियम में शिथिलता बरत दी है। जब उनसे यह पूछा कि इस शर्त के अलावा खेल मैदान, टॉयलेट आदि सुविधायें भी न होने के भी कारण हैं?, इस सवाल पर डीपीसी बोले कि अभी मैं खाना खा रहा हूं, आप मुझे लिस्ट भेज दो, मैं जांच करवा लूंगा। शिवपुरी जिला मुख्यालय पर ही नियमों को ताक ओर रखकर प्राइवेट स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिसमें शिक्षा विभाग साझेदार बना हुआ है।




