
प्रकृति हुई मेहरबान, तो नेताओं ने भी दौड़ाए पानी के टैंकर, शहर हो जाएगा अब पानी-पानी
शिवपुरी शहर में आ गए बैनर लगे पानी के टैंकर, अब मत कहना कि जनता की सुध नहीं ले रहे
शिवपुरी। भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान शिवपुरी शहर की जनता पर बीते शुक्रवार की देर शाम प्रकृति मेहरबान हुई, तो शनिवार को नेताओं ने भी अपने बैनर लगे पानी के टैंकर दौड़ा दिए। आज शहर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं भाजपा महामंत्री लवलेश जैन एवं योगेंद्र यादव के फोटो के बैनर वाले टैंकर बाजार में नजर आए। उधर बड़े टैंकरों से सम्पबेल भर रहे हैं, तो छोटे टैंकर घरों में पानी की आपूर्ति करने के लिए निकल पड़े हैं। अब शिवपुरी शहर में हर तरफ सिर्फ पानी ही पानी होगा। अब मत कहना है कि हमारे माननीय कुछ नहीं कर रहे, भले ही नल सूखे हों, लेकिन घरों में पानी टैंकरों से पहुंचाने की शुरुआत हो गई।
लगभग 4 वर्ग किमी क्षेत्रफल में बसे शिवपुरी शहर को जब सिंधिया परिवार ने बसाया था, तब पानी की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए शहर सहित आसपास 18 तालाब बनाए गए थे, जो नालों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। इनमें सबसे ऊंचाई पर मनियर तालाब बनाया गया था। इन तालाबों में से 13 तालाब पहले ही भूमाफिया निगल गए, तथा 14वाँ तालाब मनियर पर भी कब्जा हो गया। बारिश के पानी को भूतल में पहुंचाने वाली रिचार्ज संरचनाओं के खत्म होने के साथ ही शहर में नियमों को ताक पर रखकर सैकड़ों ट्यूबेलों का खनन कर दिया गया। यानि बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने की संरचनाओं को खत्म करके जमीन के अंदर से पानी का दोहन करने के लिए सैकड़ों गड्ढे कर दिए गए। शहर में नगरपालिका के ही लगभग 400 ट्यूबेल हैं, जबकि इससे दोगुने प्राइवेट ट्यूबेल खोद दिए गए। जिसके चलते भूमि का जल रसातल में पहुंच गया, तथा गर्मियों में 1 हजार फीट की गहराई में भी पानी मिलना बंद हो गया।
ड्राई जोन हो चुके शिवपुरी शहर में पानी की सुविधा के लिए सिंध जलावर्धन योजना लाई गई, जो 54 करोड़ से शुरू होकर लगभग 200 करोड़ रुपए लागत तक पहुंच गई। इतनी बड़ी शासकीय धनराशि खर्च करने के बाद भी शहर के हालात यह बने हुए हैं कि नेताओं के बैनर लगे टैंकर पानी उपलब्ध करवा रहे हैं। आखिर शहर में ऐसे हालातों को बनाने वाला कौन जिम्मेदार..?, जबकि प्रदेश सरकार ने जन सुनवाई के साथ ही जल सुनवाई कार्यक्रम गर्मी से पहले ही शुरू कर दिया था। तो फिर आखिर सुनवाई में कहां कमी रह गई, कि समय रहते मोटरों को बदला नहीं गया..? शहर को फिर टैंकरों के भरोसे करने वाला जिम्मेदार कौन है..?








