
मोती बाबा रोड पर रहने वाले डॉ. रंगड़ बोले: बिजली की लुकाछिपी से गर्मी में बेहाल, मच्छर बैठने नहीं दे रहे
शिवपुरी। विवादों में मुझे मत घसीटो, मैं विकास की बात करता हूं, और मुझे काम कराना आता है। केंद्रीय मंत्री एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की यह लाइनें कुछ दिन पहले वायरल हुईं थीं। तो आइए हम अपने शहर के विकास की बात करते हैं, जो हमारे क्षेत्रीय सांसद को भी देखना चाहिए::::
पानी:::
15 वर्षीय सिंध जलावर्धन योजना की मोटरों के खराब होने से पानी की सप्लाई ठप हो गई। भीषण गर्मी के बीच जब पानी की खपत 4 गुना बढ़ गई, तब शहर की जनता लू के थपेड़ों के बीच पानी भरने की कतार में लगी है। प्राइवेट टैंकरों के दाम भी आसमान छू रहे हैं, जो बुकिंग करने के बाद 8 से 10 घंटे बाद मिल रहा है।
बिजली::
शिवपुरी शहर में इन दिनों बीते रोज हुई बारिश के बाद उमस भरी गर्मी ने बेहाल कर दिया। पंखा बंद होते ही लोग पसीने में नहा रहे हैं। शहर में चौतरफा गंदगी होने की वजह से मच्छरों की भरमार होने से बिजली गुल होने के बाद लोगों का घर के बाहर बैठना मुश्किल हो जाता है। आंधी आए हुए 3 दिन गुजर गए, लेकिन बिजली की सप्लाई नियमित नहीं हो पाई। कोठी नम्बर 8 के सामने मोतीबाबा रोड पर रहने वाले डॉ. सुरेश रंगड़ ने बताया कि पिछली दो रात से हमारा परिवार अघोषित बिजली कटौती की वजह से सो नहीं पाया। यह शहर के कई हिस्सों का दर्द है। यह हालात तब हैं, जबकि जिले के प्रभारी मंत्री सिंधियानिष्ठ प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रदेश के ऊर्जा मंत्री भी हैं।
ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त, मर रहे लोग::
बीती रात आईटीबीपी के सामने एक डंपर ने बडौदी क्षेत्र के बाइक सवार दो युवाओं को रौंद दिया, जिससे दोनों की मौत हो गई। नो एंट्री में भारी वाहनों को पैसा लेकर शहर में से निकाला जा रहा है। ट्रैफिककर्मी वसूली में लगे हैं, तथा शिवपुरी शहर की हर रोड पर ट्रैफिक जाम है। जिला अभिभाषक संघ के जिलाध्यक्ष एडवोकेट विजय तिवारी ने भी इस संबंध में एसपी सहित आईजी ग्वालियर को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है। अस्पताल चौराहे पर मॉल के सामने शाम होते ही बीच सड़क तक वाहन पार्क होने से जाम लगा रहता है। ट्रैफिक प्रभारी का कहना था कि मॉल वाला बेसमेंट में पार्किंग कुछ दिन में बना लेगा, तो क्या वो कुछ दिन अभी नहीं हुए..?। सिद्धेश्वर मेला ग्राउंड के पास ईंट, बजरी, गिट्टी के डंपर हर रोज शहर में आ जा रहे हैं। हद तो तब हुई कि मेला लगा होने के बावजूद डंपरों व ट्रकों की आवाजाही दो बत्ती से वहां तक होती रही









