
प्राकृतिक कहर के बीच शिवपुरी शहर में पुराने पेड़ों के उखड़ने से रसातल में पहुंचे जलस्तर के खतरनाक संकेत
ड्राई जोन हो चुके शिवपुरी शहर में गर्मियों के दौरान 1 हजार फीट गहराई में भी नहीं निकल रहा पानी, जड़ें हुईं कमजोर
शिवपुरी। प्रकृति जब अपना कहर बरपाती है तो पानी में छोटे जहाज को डुबो देती है, तो कहीं तबाही मचा देती है। शिवपुरी शहर की पौने 3 लाख की आबादी ने शनिवार को तेज आंधी का ऐसा स्वरूप देखा कि छत से गिर कर महिला और किशोरी चोटिल हो गए। इस दौरान शहर में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर बरसों पुराने पेड़ जड़ से उखड़कर धराशाई हो गए। जिनके नीचे दबने से एक दर्जन से अधिक लोग जख्मी हो गए, वो अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। प्रशासन की टीम भी अस्पताल में घायलों को देखने पहुंची।
शिवपुरी शहर में आज जो कुछ घटा, वो आने वाले भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है। क्योंकि भीषण गर्मी में जो पेड़ ठंडी छांव देते हैं, उनकी जड़ें पानी की कमी के चलते कमजोर हो गई, तथा पुराने पेड़ भी जड़ सहित उखड़कर गिरने लगे हैं। आखिर ऐसे हालात क्यों बन रहे हैं, इस पर गहन चिंतन की जरूरत है। शिवपुरी के पीजी कॉलेज में भूगोल के प्रोफेसर रहे वीपी सती ने बरसों पहले मेरी एक खबर में बताया था कि भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम ने अपने सर्वे में यह पाया था कि रेगिस्तान पोहरी की तरफ से शिवपुरी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण जल संरचनाओं पर कब्जे करके खेती करने से रीचार्जिंग संरचनाएं खत्म हो रही हैं, जबकि नियमों को ताक पर रखकर अंधाधुंध ट्यूबबेल खनन से लगातार जमीन के अंदर से पानी का दोहन किया जा रहा है।
शिवपुरी की सिंधिया छत्री के एक हजार वर्ष पुराना पेड़ है, तो वहीं शहर में कई ऐसी जगह हैं, जहां पर पुराने पेड़ विशालकाय आकार लेकर खड़े हैं। भीषण गर्मी के बीच इन पेड़ों के नीचे लोग जीवन महसूस करते हैं, लेकिन आज जैसी आई तेज आंधी के दौरान इन पेड़ों के आसपास रुकना या इनकी आड़ में छिपना अब किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। शहर में आज कई लोग इन उखड़े पेड़ों की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच गए।
अब यह जरूरी हो गया::
शिवपुरी शहर का मनियर तालाब जैसी अन्य जल संरचनाओं को सहेजना जरूरी हो गया। शहर में अंधाधुंध हो रहे ट्यूबबेल खनन पर भी रोक लगनी चाहिए। पूर्व मंत्री एवं शिवपुरी विधायक ने अपने कार्यकाल के दौरान मनियर में आयोजित एक कार्यक्रम में हाथ जोड़कर अपील की थी कि अब धरती की छाती में और छेद मत करो।








