
जुलाई के बचे 7 दिन, जल संरचनाओं में 50 फीसदी पानी, खरीफ में नहरों से सिंचाई पर रोक
पेयजल के लिए पानी संरक्षित रखना जरूरी, आने वाले दिनों में बारिश हुई, तो करेंगे निर्णय
शिवपुरी। जुलाई माह को खत्म होने में अब महज 7 दिन शेष हैं, बावजूद इसके शिवपुरी जिले के बड़े जलाशयों में पानी औसतन 50 फीसदी ही मौजूद है। इनमें से मड़ीखेड़ा डैम से शिवपुरी शहर को पेयजल सप्लाई होता है, जिसके लिए जल संरक्षण जरूरी है। जल संरचनाओं में पानी कम होने की वजह से जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि फिलहाल खरीफ फसलों के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाएगा। यदि आने वाले दिनों में बारिश हुई तथा जल संरचनाओं में वाटर लेबल बढ़ा तो फिर नहरों में पानी छोड़ने के लिए बैठक में विचार किया जाएगा। यह निर्णय शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जल उपयोगिता समिति की बैठक में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कही। बैठक में खरीफ एवं रबी सिंचाई, पेयजल आरक्षण, जलाशयों में उपलब्ध जल की स्थिति तथा आगामी मौसम की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत समीक्षा की गई।
जिले के जलाशयों की वर्तमान स्थिति:
अटल सागर (मड़ीखेड़ा बांध) में 484.32 एमसीएम (58.01 प्रतिशत), मोहिनी पिकअप वियर में 32.58 एमसीएम (32.67 प्रतिशत) तथा हरसी बांध में 261.39 एमसीएम (57.87 प्रतिशत) जल उपलब्ध है। तकनीकी रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान तथा सुपर एल-नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे अटल सागर बांध का जल स्तर निर्धारित ‘रूल कर्व’ से नीचे बना हुआ है।
नहरों का संचालन उपयुक्त नहीं:
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बताया गया कि वर्तमान जल उपलब्धता से खरीफ मौसम में नहरों का संचालन करना व्यवहारिक एवं तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। यदि इस समय खरीफ सिंचाई के लिए जल छोड़ा जाता है, तो फसल अवधि तक निरंतर जल आपूर्ति के कारण बांध का जल स्तर डेड स्टोरेज तक पहुंचने की आशंका रहेगी। ऐसी स्थिति में आगामी रबी मौसम के दौरान लगभग 58 हजार 229 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित हो सकती है तथा पेयजल उपलब्धता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए निर्णय लिया गया कि खरीफ फसलों के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाएगा।
पुनः विचारण के लिए बैठक 29 को:
समिति ने यह भी निर्णय लिया कि यदि आगामी दिनों में बारिश से जलाशयों में पर्याप्त जल आवक होती है और जल स्तर निर्धारित रूल कर्व से ऊपर पहुंचता है, तो खरीफ सिंचाई के लिए नहर संचालन पर पुनः विचार किया जाएगा। समिति की अगली बैठक 29 जुलाई को होगी।






