
शहर में नहीं आ रही सिंध की सप्लाई, विधायक व नपाध्यक्ष के बीच चल रहा गौशाला का द्वंद
जनता के मूल मुद्दों को भूल कर राजनीति करने में मशगूल हमारे क्षेत्र के नेता, किससे करें उम्मीद
शिवपुरी। सिंध जलावर्धन योजना की सप्लाई एक बार फिर से ठप हो गई है, तथा शहर की जनता पानी का इंतजार कर रही है। शिवपुरी के विधायक एवं नगरपालिका अध्यक्ष जनता की मूलभूत समस्याओं को छोड़ गौशाला के मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ने में व्यस्त हैं।
गौरतलब है कि शिवपुरी शहर की लाइफ़ लाइन बन चुकी सिंध जलावर्धन योजना पिछले काफी समय से जुगाड़ में चल रही है। खराब हो चुकी मोटरों को बदलने की बजाए उन्हें रिपेयर करके चलाया जा रहा है। पिछले दिनों नपाध्यक्ष ने इस मामले में सीएमओ पर आरोप लगाया था कि शहर की जनता को जान- बूझकर पानी के लिए तरसाया जा रहा है। भीषण गर्मी में नौतपा के दौरान भी शहर की जनता पानी के लिए परेशान रही, और अब केलेंडर के मुताबिक बरसात के मौसम में भी सिंध की सप्लाई ठप हो गई।
शहर में सिंध की सप्लाई चाहे जब बंद हो जाती है, इस पर शिवपुरी विधायक ने कभी कुछ नहीं कहा, जबकि चुनाव के दौरान उनके द्वारा बांटे गए शपथ पत्र में शहर की जनता को नियमित पानी दिलाए जाने का वायदा किया गया था। पानी जैसी मूलभूत सुविधा पर चुप्पी साधे विधायक गौशाला के मामले में नगरपालिका की घेराबंदी कर रहे हैं। जबकि अपना घर आश्रम के संरक्षण में चल रही गौशाला में गौमाता तो खुश है, लेकिन सिंध की सप्लाई न आने से शहर की जनता परेशान है।
अक्सर शहर के मुद्दों पर चुप रहने वाले शिवपुरी विधायक ने मुद्दा उठाया तो वो, जिसका अब समाधान हो चुका है। उधर नपाध्यक्ष भी सिंध की सप्लाई को पुनः चालू कराने में सक्रियता दिखाने की बजाए, अपनी कुर्सी बचाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के स्वागत सत्कार में अपना जिला छोड़कर दूसरे जिले में दौड़ लगा रही हैं। पहले यह माना जा रहा था कि लोहे की पाइप लाइन डाले जाने के बाद शहर में नियमित पानी आएगा, लेकिन किसी बड़े श्राप को झेल रहे शिवपुरी शहर में कुछ भी बेहतर नहीं हो पा रहा।
मौसम की बेरुखी से कम नहीं हो रही खपत:
जून महीने का आखिरी दिन होने के बावजूद उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हैं। बारिश का मौसम कैलेंडर में तो शुरू हो गया, लेकिन प्री मानसून की तरह ही जब कभी बौछारें पड़ रही हैं। गर्मी का असर कम न होने की वजह से घरों में पानी की खपत भी कम नहीं हो रही है। शिवपुरी शहर की जनता ने यह सोचकर स्थानीय नेताओं पर भरोसा किया था कि शायद वो आमजन की पीड़ा को समझेंगे, लेकिन वो तो लीक से हटकर राजनीति कर रहे हैं।







