
तो फिर इस मृत प्रायः सीवर प्रोजेक्ट में कौन दे रहा है करोड़ों की राशि का ऑक्सीजन
अवैध रूप से सीवर चैंबरों में घरों के कनेक्शन के रहे लोग, पूरा शहर बन जाएगा सीवर चैंबर, अब नहीं ले रहा प्रोजेक्ट लाने का कोई क्रेडिट
शिवपुरी। झील संरक्षण परियोजना के तहत शिवपुरी शहर में सीवर प्रोजेक्ट इसलिए स्वीकृत हुआ, ताकि नालों के माध्यम से सांख्य सागर झील में जाने वाली गंदगी रुक सके। इसे शिवपुरी का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि पहले नालों से गंदगी जा रही थी, लेकिन अब नालियों से होकर भी यह गंदगी उसमें पहुंच रही है। शासन के करोड़ों रुपए खर्च करके शहर की हर गली व मुख्य सड़क को गहराई तक खोदकर खोखला कर दिया। उन सड़कों को बनाने में शासन के करोड़ों रुपए खर्च हो गए, बावजूद इसके यह प्रोजेक्ट फैल हो गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मृत प्रायः प्रोजेक्ट में करोड़ों की राशि वाली ऑक्सीजन देने का सपोर्ट कौन कर रहा है..?, अब इस प्रोजेक्ट का क्रेडिट लेने वाले कहां चले गए..?
13 साल पहले शुरू हुए सीवर प्रोजेक्ट को 2 साल में पूरा होना था। ट्रीटमेंट प्लांट को बने हुए ही 9 साल हो गए, लेकिन अभी तक घरों के सीवर चैंबर का कनेक्शन लाइन में नहीं हो सका। क्योंकि आम जनता को इसका लाभ कैसे मिलेगा?, उस पार्ट को प्रोजेक्ट में शामिल ही नहीं किया गया। प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए सैकड़ों सीवर चैंबर क्षतिग्रस्त होकर दफन हो गए, जिसके चलते शहर में डाली गई गई सीवर की लाइन जगह-जगह से चौक हो गई।
बरसों तक धूल उड़ने से बढ़े अस्थमा मरीज::
शिवपुरी शहर में सीवर प्रोजेक्ट के नाम पर की गई खुदाई की वजह से बरसों तक शहर की जनता ने धूल फांकी, जिसके चलते अस्थमा के मरीजों में इजाफा हो गया। ऊबड़- खाबड़ सड़कों की वजह से शहरवासियों को सर्वाइकल के दर्द ने परेशान कर दिया, तथा दर्द का इलाज करने वाले भरत अग्रवाल, भी इस बात के प्रमाण हैं।
इसलिए बन जाएगा यह शहर सीवर चैंबर::
शिवपुरी शहर में जिन लोगों के घरों के सामने से सीवर की लाइन और चेंबर नजदीक था, उन्होंने ठेकेदार के लोगों से मिलकर अपने घरों के कनेक्शन लाइन में करवा लिए। इन अवैध कनेक्शनों की वजह से सीवर लाइन में गंदगी जाना शुरू हो गई, लेकिन जगह-जगह लाइन चौक होने से जब लाइन फुल हो जाएगी तो सीवर चैंबर शहर में उफनेंगे। जिसके चलते जो स्थिति अभी कोर्ट रोड सब्जी मंडी एवं अस्पताल चौराहे पर बन रही है, वो हालात पूरे शहर के हो जाएंगे।
बैठक में हर बार कागजों में जीवित प्रोजेक्ट:
हाईकोर्ट खंडपीठ ग्वालियर में लगी पीआईएल में जिम्मेदार अधिकारी सीवर प्रोजेक्ट पर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे। वहीं इसके उलट कलेक्ट्रेट में होने वाली बैठक में क्षेत्रीय सांसद को कागजों में इस प्रोजेक्ट को जीवित बताकर और भी राशि लाने की मांग की जाती है।







