
कैसे पूरा होगा विजन शिवपुरी?: नपाध्यक्ष मंच से उचट कर भाग रहीं, सीएमओ लोकायुक्त में आरोपी बन गए
कलेक्टर व एसपी मॉनिटरिंग कर सकते हैं, कार्य एजेंसी तो नगरपालिका ही है, शायद 2047 में पूरा होगा
शिवपुरी। बीते 26 जनवरी को नगरपालिका ने विजन शिवपुरी की आकर्षक झांकी बनाई थी, जिसमें क्षेत्रीय सांसद का फोटो भी लगा था। पिछले दिनों कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विजन शिवपुरी को लेकर बैठक हुई, जिसमें विधायक ने स्पष्ट कहा कि पहले जनता को पानी व सड़क जैसी मूलभूत सुविधा दो, क्रीम-पाऊडर तो बाद में लगता रहेगा। विजन शिवपुरी का सपना पूरा करने की जिम्मेदारी नगरपालिका की है, लेकिन उसमें हालात बेहद खराब हैं, नौतपा की गर्मी के बीच शहर की जनता पानी ढोने को मजबूर है। नपाध्यक्ष मंच छोड़कर भाग रही हैं, तो सीएमओ को लोकयुक्त पुलिस ने 40 हजार की रिश्वत मामले में सह आरोपी बना दिया। कहीं ऐसा तो नहीं कि विजन शिवपुरी का सपना 2047 में पूरा होगा, विकसित भारत का यह वर्ष पिछले दिनों क्षेत्रीय सांसद ने मीडिया से चर्चा में बताया था।
देश में धूम मचाने वाले कोकरोच जनता पार्टी के सवाल पर कुछ भी कहने से इनकार करने वाले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया से कहा था कि हमने प्रधानमंत्री के साथ बैठक कर विकसित भारत 2047 मिशन पर साढ़े 5 घंटे चर्चा की है। यानि 2026 में जनता को पानी जैसी आवश्यक मूलभूत सुविधा नहीं दे पा रहे, तो अगले 21 वर्ष में क्या पानी के पाउच बाँटे जाएंगे..?। विजन शिवपुरी को धरातल पर नगरपालिका कैसे उतार पाएगी, जबकि उसके जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक मानसिक तनाव के बीच कमाई का कोई रास्ता नहीं छोड़ रहे।
नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा की सीएमओ से आमने- सामने की रार ठनी हुई है। कल वो जल गंगा संवर्धन के मंच से गुस्से में उठकर चली गईं, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह रही कि वहां मौजूद किसी भी दूसरे जनप्रतिनिधि ने रोका तक नहीं। उधर भ्रष्टाचार के मामले में नाम बढ़ने का डर अलग बना हुआ है। इन हालातों में नपाध्यक्ष कैसे विजन शिवपुरी का काम कर पाएंगी..?
सीएमओ इशांक धाकड़ भी चौतरफा मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। 40 हजार की रिश्वत में बाबू ने अपना मुंह खोल दिया, तो लोकयुक्त में दर्ज रिश्वत के प्रकरण में सह आरोपी बन गए। उधर भ्रष्टाचार के मामले में नाम बढ़ने की पूरी संभावना है, तथा शासन से भी विरोध लेकर निलंबन के खिलाफ न्यायालय से स्टे लेकर आए हैं। गुना में तो इन्हीं प्रभारी मंत्री ने झूठ बोलने पर माला पहनाई थी, अब अपने घर शिवपुरी में क्या होगा..भगवान ही जाने, क्योंकि वास्तुदोष का गणित तो फेल हो गया।
43-44 डिग्री तापमान में पानी ढो रहे लोग:
पुराने समय में एक राजा की कहानी सुनी थी कि वो रात में भेष बदलकर यह जानने के लिए नगर में घूमता था कि प्रजा किस हाल में है। यह बातें राजतंत्र के समय के राजा की हैं, जबकि इसके उलट लोकतंत्र का राजा शायद यह चाहता है कि यदि प्रजा को सभी सुविधाएं दे दीं, तो फिर वो मुझे क्यों पूछेगी..!, शायद यही वजह है कि शिवपुरी शहर की जनता 43-44 डिग्री तापमान में नौतपा के दूसरे दिन कट्टियों से पानी ढो रही है।







