
सुरक्षा का भाव देने वाली वर्दी, अब अपने सीनियर को भी नहीं पहचान रही, आमजन कैसे करे उम्मीद..?
रिटायर्ड डीएसपी व उनकी पत्नी के साथ पुलिस की अभद्रता का प्रदेश भर में विरोध, देशभक्ति – जनसेवा के स्लोगन पर लगाया दाग
शिवपुरी से सैमुअल दास:::
पुलिस की वर्दी आमजन को सुरक्षा का भाव देती है, लेकिन अब वो अपने ही सीनियर के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करने लगी। बीते 7 अप्रैल को पन्ना-छतरपुर रोड पर खरगोन जिले में रिटायर्ड डीएसपी चौहान व उनकी पत्नी के साथ चेकिंग के नाम पर पुलिसकर्मियों ने जो अभद्रता की, उसने पूरे पुलिस महकमे पर गम्भीर सवाल खड़े कर दिए। पूरे प्रदेश में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी- कर्मचारी ज्ञापन देकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
पुलिस ही एकमात्र ऐसा विभाग है, जिसके कर्मचारी कभी हड़ताल पर नहीं जाते। इसकी एक वजह यह भी है, क्योंकि समाज का संतुलन बनाने में पुलिस अहम भूमिका निभाती है। यदि पुलिस एक दिन के लिए काम करना बंद कर दे तो पूरे समाज में मारकाट और खून खराबा हो जाएगा। पुलिस की वर्दी का खौफ ही है, जो अपराधियों को अपराध करने से रोकता है। हालांकि पुलिस में भी समाज के ही लोग होते हैं, इसलिए कुछ पुलिस वाले रामवीर दाऊ जैसे भी निकल जाते हैं। बावजूद इसके आज भी वर्दी का खौफ अपराधियों में रहता है, तथा आमजन को सुरक्षा का भाव रहता है।
रात का अंधेरा हो या वीरान जगह पर यदि किसी को डर लग रहा हो, और इसी बीच उसे यदि वर्दी वाला मिल जाए, तो उसके अंदर सुरक्षा का भाव आ जाता है । समाज का संतुलन बनाने वाली पुलिस में अभी भी कई अधिकारी-कर्मचारी ऐसे हैं, जो आमजन के लिए ईमानदारी से काम करके पुलिस की छवि को बनाए हुए हैं।
बीते 7 अप्रैल को रिटायर्ड डीएसपी चौहान और उनकी उम्रदराज पत्नी के साथ खरगोन पुलिस ने जो किया, उसने पुलिस को शर्मसार कर दिया। यही वजह है कि आज पूरे प्रदेश सहित देश भर में उस घटना की निंदा करते हुए दर्ज किए गए मामले को वापस करने की मांग रखी है।
यूजीसी का खेल तो नहीं
अभी तक तो पुलिस से रिटायर्ड अधिकारियों से इस तरह का व्यवहार पुलिस का कभी सामने नहीं आया। कहीं इस तरह के दुर्व्यवहार के पीछे यूजीसी जैसा कोई मुद्दा तो काम नहीं कर रहा।






