
सिंधिया राजवंश की ग्रीष्मकालीन राजधानी में अब टूटने लगा गर्मी का कहर, एसी भी हुए फेल
आग बरसा रहा सूरज, गर्मी का कर्फ्यू लगा, व्यस्ततम चौराहों पर छा रही वीरानी, 30 अप्रैल तक कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की छुट्टी
शिवपुरी। सिंधिया राजवंश की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिवपुरी में अब गर्मी सहने के बाहर हो गई। पिछले तीन दिन से पारा 41- 42 डिग्री के बीच झूल रहा था, जबकि सोमवार को तापमान 43 डिग्री तक पहुंच गया। बढ़ती गर्मी को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने 30 अप्रैल तक कक्षा 1 से 8 तक की छुट्टी कर दी। महत्वपूर्ण बात यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि गर्मियों में ठंडी रहने वाली शिव की नगरी में अब एयर कंडीशनर भी फेल होने लगे हैं।
शहर सहित जिले भर में इन दिनों सूरज आग उगल रहा है। दोपहर होते ही गर्मी का कर्फ्यू शहर के व्यस्ततम चौराहों पर नजर आया। लोगों को घबराहट व बेचैनी की शिकायत भी होने लगी। तीखी गर्मी को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की 30 अप्रैल तक छुट्टी कर दी गई।
SD News ने सोमवार को शहर के झांसी तिराहा, गुरुद्वारा चौराहा एवं माधव चौक पर दोपहर 12:50 बजे से 1:115 बजे के बीच जब हालात देखे, तो लोगों की आवाजाही कम होने के साथ ही जो लोग घरों से निकले, वो भी अपनी सुरक्षा के साथ घरों से निकले। कवरेज के दौरान कई स्कूल बसों में बच्चे सवार होकर अपने घर जाते नजर आए, जबकि स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक का किया गया, लेकिन प्राइवेट स्कूल के बच्चे दोपहर डेढ़ से 2 बजे तो भीषण गर्मी के बीच घर पहुंच रहे हैं।
गर्मी के तीखे तेवरों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी एडवाइजरी जारी की है कि तापमान अधिक होने के साथ ही लू भी चल रही है, इसलिए पहला प्रयास कि धूप में न निकलें। यदि जरूरी है तो साफ पानी पीकर और कान, नाक व सिर कपड़े से ढंक कर ही निकले। पानी, शीतल पेय पदार्थ के अलावा नींबू पानी आदि का उपयोग करें। बुजुर्ग और बच्चों को विशेषकर धूप में निकलने से बचाए। हालांकि दोपहर लगभग 2 बजे जब असमान पर बादल आने लगे, और सूरज की उनके पीछे लुकाछिपी शुरू हुई, तो जरूर कुछ राहत मिलती रही।
इसलिए धधकने लगी शिवपुरी
सिंधिया राजवंश ने जब शिवपुरी को बसाया था, तब शहर व उसके आसपास 18 तालाब थे, जो पक्के नालों से जुड़े होने के साथ ही नालों में साफ पानी रहता था। अब इनमें से 13 तालाबों का अस्तित्व खत्म हो गया, था 14वा मनियर तालाब भी खत्म होने की कगार पर पहुंच गया। दो फोरलेन बनाने में हजारों पेड़ काटे गए, तथा बदले में पेड़ लगाने की राशि का बंदरबांट हो गया। जंगल की लगभग 25 हजार हेक्टेयर जमीन पर खेती हो रही है। लगातार खत्म होती हरियाली व तालाबों पर कब्जे होने से शिव की नगरी अब धधकने लगी है।







