
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने पिछोर विधायक प्रीतम से मांगा 3 दिन में मांगा स्पष्टीकरण
करेरा टीआई की भूमिका संदिग्ध, वीडियो में दिनेश बोल रहा कि हॉर्न देने पर भी नहीं हटे, तो मारी टक्कर, धारा 304 लगाई क्या?
शिवपुरी। पिछोर विधायक के वीडियो जब देश भर में चले तो उन पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की नजर पड़ गई। बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष ने विधायक प्रीतम लोधी को पत्र जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब न देने की स्थिति में एकतरफा कार्यवाही किए जाने की बात भी लिखी है। उधर पुराने वीडियो में विधायक पुत्र दिनेश लोधी स्वयं यह कह रहा था कि मैने हॉर्न बजाया, लेकिन यह बाइक पर तीन लोग सवार होकर लहराते हुए चल रहे थे, यानि उसने जानबूझकर टक्कर मारी। तो क्या करेरा टीआई ने धारा 304 लगाई..? यदि नहीं, तो इस विवाद में टीआई की भूमिका भी संदिग्ध है।
पिछोर विधायक प्रीतम लोधी के छोटे बेटे दिनेश लोधी ने थार गाड़ी से टक्कर मारने के बाद पीड़ित के परिजनों के पूछने पर कहा था कि मैने तो हॉर्न बजाया था, लेकिन बाइक वाले जान बुझकर लहरा कर आगे गाड़ी चला रहे थे। इसका मतलब वो स्वीकार कर रहा है कि उसने जान बुझकर टक्कर मारी थी। तो फिर करेरा के बहुचर्चित टीआई विनोद छावई ने पहले तो अज्ञात में एफआईआर काटी, और फिर नाम बढ़ाने के बाद भी धारा 304 नहीं लगाई, जो गैर जमानती है। इतना सब होने के बाद जब दिनेश को थाने पर बुलवाया, तो उससे बातचीत और बाहर ले जाने के वीडियो बनवाकर टीआई ने वायरल करवाए, जिससे विधायक का पुत्र प्रेम जाग गया। इस पूरे खेल में मोहरा एसडीओपी को बना दिया, जबकि गलती टीआई करते गए।
उधर पहला वीडियो वायरल हुआ तो विधायक ने अपने डायलॉग बदल — बदल कर तीन वीडियो और बनवा कर वायरल कर दिए। विधायक सोच रहे थे कि एसडीओपी (आईपीएस) आयुष जाखड़ के खिलाफ उनके वीडियो हाइट दे रहे हैं, लेकिन आईपीएस एसोसिएशन के मैदान में आने के बाद पार्टी नेताओं ने भी एक्शन का मन बनाया। जिसके चलते आज जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का पत्र आया, जिसमें 3 दिन में स्पष्टीकरण मांगा, तो वीडियो बनाना तो दूर, विधायक ने बातचीत करना ही बंद कर दिया।
पहले भी गलती पर हो चुके हैं निष्कासित
पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने एक बार ब्राह्मणों के खिलाफ भी टिप्पणी कर दी थी, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद पूरा ब्राह्मण समाज विरोध में आ गया था। इस मामले में प्रीतम लोधी को भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था, लेकिन बाद में वापस ले लिया था। इस बार प्रदेश अध्यक्ष का पत्र क्या गुल खिलाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल तो विधायक ने चुप्पी साध ली है।







