
सतनबाड़ा में पिता की पैतृक जमीन में से हिस्सा नहीं दे रहे भाई, बेटी ट्यूशन पढ़ाकर उठा रही खर्चा
शिवपुरी। हर मंगलवार को जनसुनवाई जैसा कार्यक्रम प्रदेश सरकार ने इसलिए शुरू किया है, ताकि उसमें शिकायत लेकर आने वाले लोगों की सुनवाई हो सके। सुनवाई की आस लेकर दिव्यांग शिवनारायण शर्मा हर बार मंगलवार को जन सुनवाई में जाता है, लेकिन उसे हर बार दुत्कार ही मिलती है।
हाउसिंग बोर्ड कालोनी में रहने वाले शिवनारायण शर्मा ने बताया कि हम चार भाई थे, जिनमें से दो अभी जीवित हैं। इन भाइयों की पैतृक भूमि एवं अटारी आदि सतनबाड़ा में मौजूद है। पिता ने मरने से पहले जमीन का बंटवारा कर दिया था, लेकिन उनके रहने वाली अटारी व पाटौर को बांटने से पहले ही पिता दुनिया छोड़ गए। शिव नारायण ने बताया कि मेरा एक्सीडेंट होने के बाद सीधे पैर में रॉड डाली गई है, जिस वजह से वो ठीक से चल नहीं पाते। दो बच्चों के पिता शिव नारायण का बेटा किसी प्राइवेट कंपनी में काम करता है, जबकि बेटी खुद भी बाहर रहकर कम्पटीशन की तैयारी करने के साथ ट्यूशन पढ़ाकर जो कुछ कमाती है, उसमें से वो राशि भेजकर अपने पिता की दाल-रोटी चला रही है। शिव नारायण की पत्नी रचना भी बेटी के साथ ही रहती हैं। शिव नारायण को अपनी बेटी की शादी भी करना है, जिसके लिए वो अपने पिता की रहवासी वाली जमीन में से हिस्सा लेने के बाद उसे बेचकर बेटी की शादी करने का प्रयास कर रहा है। उसे उम्मीद थी कि नियमानुसार वो अपने पिता की जमीन में वैध हिस्सेदार है, इसलिए प्रशासन उसे वो जमीन का हिस्सा दिलवा देगा।
दिव्यांग शिव नारायण का कहना है कि पहले तो जन सुनवाई में मेरा आवेदन लेकर कार्यवाही का आश्वासन देते थे, लेकिन अब तो अधिकारी आवेदन फेकने के साथ ही दुत्कार कर भगा देते हैं। उम्रदराज दिव्यांग का कहना है कि मुझे मेरी बेटी पाल रही है, लेकिन मेरा भी दायित्व है कि अपनी बेटी के हाथ पीले करूँ। अब जबकि भाई ही उसका हिस्सा नहीं दे रहे, तथा प्रशासन भी सुनवाई नहीं कर रहा, तो वो अपनी बेटी की शादी कैसे कर पाएगा, यह उसकी समझ में नहीं आ रहा।









