May 7, 2026
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शहर की जनता मांगती रही पानी, किसी नेता ने नहीं सुनी पुकार, शहर में निःशुल्क टैंकर चलाने की घोषणा तो हुई
शिवपुरी। दो साल में पूरी होने वाली सिंध जलावर्धन योजना को 15 वर्ष होने के साथ ही उसकी लागत भी 200 करोड़ तक पहुंच गई,।लेकिन जनता को पानी फिर भी नहीं मिल पा रहा। पिछले 17 दिन से पानी की सप्लाई न होने से शहर में फिर से कट्टी का युग आ गया, लेकिन इस दौरान किसी भी जनप्रतिनिधि ने यह जहमत नहीं उठाई कि एक बार जनता से उसका हालचाल ही पूछ लेते या फिर पानी क्यों नहीं आ रहा, यह देखने फिल्टर प्लांट तक चले जाते। बुधवार को कलेक्टर अर्पित वर्मा जब फिल्टर प्लांट पर पहुंचे, तब कहीं जाकर गुरुवार को थोड़ा पानी नलों में आया, जो अब शुक्रवार से पर्याप्त आने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि इतने दिनों से शहर की जनता पानी के लिए भटक रही है, प्राइवेट टैंकर के रेट 700 से 800 रुपए तक पहुंच गए, लेकिन किसी भी नेता ने जनता के इस दर्द को नहीं समझा। शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन तो अपने व अपने लोगों के काम कराने में व्यस्त हैं, क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर से प्लेन उड़ाने में मशगूल हैं, जबकि उनके संसदीय क्षेत्र की जनता पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं। नपाध्यक्ष ने जरूर हुंकार भरी थी, लेकिन उनका गुस्सा शहर की जनता के लिए न होकर गांधी जी के लिए अधिक था। आखिर जनता इन्हें वोट देकर नेता बनाती क्यों है, जबकि यह जनता की परेशानी में कहीं नजर नहीं आते।
टैंकर के सहारे घर-घर पहुंचने की तैयारी..!
वर्ष 2006-07 में हुए शिवपुरी विधानसभा उपचुनाव के कांग्रेस से वीरेंद्र रघुवंशी ने पूरी भाजपा सरकार को हराकर चुनाव जीता था। उस चुनाव पर दिल्ली तक की नजर थी। वो उप चुनाव जीत में रघुवंशी की सबसे बड़ी मदद उस पानी ने की थी, जो उन्होंने घर घर निशुल्क टैंकरों से पहुंचाया था। शहर में गहराए इस जलसंकट के दौर में जब कोई नेता आगे नहीं आया, तो बुधवार को पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी की पत्नी विभा रघुवंशी ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि मैं निःशुल्क टैंकर चलवा कर जनता को पानी पहुंचाऊंगी। इसे क्या मानें..?, आगामी विधानसभा चुनाव की दो साल पूर्व की तैयारी या फिर नपाध्यक्ष की कुर्सी…?, यह तो भविष्य में पता चलेगा। हालांकि उनके टैंकर से पहले सतनबाड़ा फिल्टर प्लांट की मोटर चल गई।
जानबूझकर मोटर गड़बड़ी की चर्चा::
सिंध जलावर्धन योजना के तहत बनाए गए सतनबाड़ा स्थित फिल्टर प्लांट पर कल निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने सीएमओ को निर्देश दिए कि गेट पर गार्ड हो, जो काम वाले व्यक्ति को ही अगर जाने दे, जिसकी पूरी जानकारी का रजिस्टर मेंटेन किया जाए। इससे तो लगता है कि मशीनों के साथ किसी ने जानबूझकर छेड़छाड़ करके शहर में कृत्रिम जलसंकट पैदा किया, ताकि प्राइवेट टैंकर वालों की कमाई हो सके।

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