
ईओडब्ल्यू में दर्ज हुई एफआईआर को जेपी ने बताया अपने खिलाफ षड्यंत्र, सौंपा ज्ञापन
..तो क्या रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग झूठी है?, क्या भूमाफिया के इशारे पर काम कर रहा ईओडब्ल्यू..?
शिवपुरी। जमीन के रिकॉर्ड में नाम दुरुस्ती के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगे जाने पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में दर्ज हुए प्रकरण में आरोपी बने पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता ने इसे अपने खिलाफ षड्यंत्र बताया। इतना ही नहीं, गुरुवार को अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने कलेक्टर अर्पित वर्मा को ज्ञापन भी सौंपा।
पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता ने मप्र राज्य प्रशासनिक सेवा संघ के लेटरहेड पर सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि मैने 12 जून को पोहरी एसडीएम का पदभार ग्रहण किया, तथा 15 जून को बाबूसिंह के नाम दुरुस्ती का प्रकरण मेरे समक्ष आया था। इस मामले में सुनवाई के लिए 6 जुलाई की तारीख तय की गई थी। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईओडब्ल्यू के प्रकरण में फरियादी बने गोविंद शिवहरे का इस मामले से कोई लेना देना ही नहीं है, इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी उल्लेख किया है कि जेपी ने पोहरी में भूमाफिया के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है, जिसके चलते उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है।
अब यह उठ रहे सवाल::

- लोकायुक्त हो या ईओडब्ल्यू, रिश्वत मांगे जाने की पहले रिकॉर्डिंग करवाई जाती है। उसके बाद पहले एफआईआर और बाद में ट्रैप किया जाता है। तो क्या भूमाफिया के कहने पर ईओडब्ल्यू ने जेपी की गलत रिकॉर्डिंग की थी..?
- प्रकरण में तारीख 6 जुलाई की लगी थी, लेकिन लेनदेन की बात तो उससे पहले ही की जाती है, जो उस रिकॉर्डिंग में हुई है।
- यह माना जा सकता है कि देश की सरकार ईडी को अपने हिसाब से चला रही है, तो क्या शिवपुरी के भूमाफिया ईओडब्ल्यू को अपने इशारों पर चला रहे हैं..?।
- ईओडब्ल्यू की कार्यवाही को क्या जेपी गुप्ता झूठा साबित करना चाहते हैं..?, यदि ऐसा है तो जिस तरह ईओडब्ल्यू ने उनकी रिश्वत मांगने की बातचीत की रिकॉर्डिंग को आधार बनाकर एफआईआर की है, ऐसा ही कोई प्रमाण वो भी पेश करें।






