
राजतंत्र के सजग प्रहरी निकले नए कलेक्टर, महाराज बोलकर किया संबोधित, सिंधिया ने पकड़ाई शिकायतों की पोटली
लुकवासा में आयोजित जनसुनवाई में आई शिकायतों का बस्ता बनाकर सौंपा कलेक्टर को, बोले: इनका निराकरण करना है
शिवपुरी। नवागत कलेक्टर शिवपुरी भी राजतंत्र के प्रहरी ही निकले। बीते शनिवार को लुकवासा में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान जब शिकायतों को ज्योतिरादित्य सिंधिया समेट रहे थे, तो माइक पर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कहा कि यदि कोई आवेदन रह गया हो तो जल्दी लाकर महाराज साहब को दें। यह सुनकर लोगों में चर्चा भी चल निकली कि डायरेक्ट आईएएस को भी जिला प्यारा होता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर होने वाली जनसुनवाई के अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष एवं विधायक भी तो लोगों की समस्याएं निपटाते होंगे। जिसमें कोलारस विधानसभा के तो अधिकांश गांव समस्यामुक्त होने चाहिए, क्योंकि गांव की सरकार की मुखिया इस बार हो नहीं, बल्कि पिछले लंबे समय से इसी क्षेत्र से जिला पंचायत अध्यक्ष बनते रहे हैं। बावजूद इसके सांसद सिंधिया की जनसुनवाई में आई शिकायतों से एक बैग भर गया। इस बैग में आवेदनों को व्यवस्थित रखकर वो बैग कलेक्टर को देते हुए सिंधिया ने कहा कि इसमें से हर एक आवेदन का निराकरण करना है आपको।
गुटखा पाउच पर कार्यवाही से क्यों बच रहा प्रशासन..?
शिवपुरी में आए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अभी तक शिक्षा एवं स्वास्थ्य की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पिछले दिनों अमोला क्षेत्र में हुई गुटखा फैक्ट्री पर कार्यवाही भी स्थानीय एसडीएम एवं एसडीओपी की पहल थी। शिवपुरी के नवागत कलेक्टर अर्पित वर्मा को मेसेज करने के बाद भी पिछले दिनों सावरकर पार्क के सामने खाली प्लॉट में भड़की आग बुझाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। अमोला की तर्ज पर ही शिवपुरी शहर से 3 किमी दूर हाइवे किनारे एवं ख़तौरा में भी इसी तरह की गुटखा फैक्ट्री चलाए जाने की भी पुख्ता जानकारी होने के बावजूद प्रशासन ने अभी तक कोई पहल नहीं की गई। इससे तो लगता है कि यह कलेक्टर भी उसी कहावत को चरितार्थ करेंगे: एक साधे- सब सधे।
आने के बाद से ही स्वागत की तैयारियों में जुटे:
श्योपुर से शिवपुरी आए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने बमुश्किल एक-दो दिन ही अपनी सरकारी संस्थाओं का निरीक्षण किया, उसके बाद से वो केंद्रीय मंत्री के होने वाले स्वागत सत्कार की तैयारियों में पूरी तरह से जुट गए। इससे लगता है कि उनके दिलोदिमाग में आज भी राजतंत्र कायम है।







