
ईरान वर्सेस अमेरिका-इजरायल के युद्ध ने शिवपुरी में बढ़ाई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी
सरकार ने 50 रुपए बढ़ाए, तो एजेंसी वालों ने सिलेंडर छुपाए, ऑनलाइन बुकिंग बंद, सिलेंडर लेकर जा रहे लोग, सिलेंडर आने के 26 दिन बाद होगी नई बुकिंग
शिवपुरी से सैमुअल दास::
दुनिया के दूसरे देशों में जब आपदा आती है तो लोग देश भावना को आगे रखकर एक-दूसरे का सहयोग करने के लिए खड़े होते हैं। भारत में इसका उल्टा असर होता है, और आपदा में अवसर ढूंढने वाले एकाएक सक्रिय होकर जमाखोरी और कालाबाजारी करके आम आदमी की जेब पर डकैती डालने की प्लानिंग करते हैं। जिसकी शुरुआत हो गई, तथा ईरान वर्सेस अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच शिवपुरी में गैस सिलेंडरों के लिए मारामारी शुरू हो गई।
इसका नजारा देखने जब SD न्यूज की टीम शहर की तीनों बड़ी गैस एजेंसियों पर गई, तो हालात कुछ ऐसे मिले:
गुरुद्वारा चौक के पास इंडेन की ऋषि गैस एजेंसी पर कोई सिलेंडर लेकर आ रहा था, तो कोई ऑनलाइन बुकिंग के लिए प्रयास कर रहा था। मोबाइल से होने वाली ऑनलाइन बुकिंग बंद करके केवायसी का राग अलापना शुरू कर दिया है। एजेंसी के बगल से एक छोटे गेट से खास लोगों को सिलेंडर दिया जा रहा था।
महल कॉलोनी में स्थित इंडेन की ईश्वर गेस एजेंसी के गेट पर एक कर्मचारी खड़ा था, जो लोगों को अंदर जाने से रोकने के साथ ही एक-एक को केवायसी के लिए भेज रहा था। एजेंसी के सामने पेड़ की छांव में शहर सहित गांव से भी कुछ लोग सिलेंडर और केवायसी के लिए दस्तावेज लेकर खड़े थे।
थीम रोड पर स्थित इंडेन की गंगाचल एजेंसी पर भी कुछ ऐसा ही नजारा था। स्कूल से बच्चे लेकर आए लोग उन्हें घर में बाद में लेकर जा रहे थे, पहले सिलेंडर की व्यवस्था करने में जुटे थे। एजेंसी के कर्मचारी बोले कि ऑनलाइन बुकिंग में भले की केवायसी का मेसेज आ रहा हो, आप तो बुकिंग के प्रयास करते रहे।
होने लगी चूल्हे की रोटी व इंडेक्शन की चर्चा
ईरान का युद्ध उधर अमेरिका व इजरायल से छोटे हुए 12 दिन गुजर गए, लेकिन कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। डीजल-पेट्रॉल से लेकर एलपीजी की सप्लाई भी ईरान व उसके आसपास एरिया से होती थी। युद्ध के चलते कई देशों की सप्लाई बंद कर दी गई, जबकि भारत के जबरन आका बन रहे अमेरिका को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि रूस के रास्ते 30 दिन पेट्रोल डीजल मिलेगा। ऐसा माना जा रहा था कि युद्ध जल्दी खत्म हो जाएगा, लेकिन पर्दे के पीछे से ईरान के साथ चीन और रूस जैसे ताकतवर लोग खड़े हो गए, इसलिए युद्ध लम्बा खिंच रहा है, और भारत में कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए। इन हालातों में जेब तो आम आदमी की ही कटना है। लोग तो यह भी चर्चा करने लगे कि एक बात चूल्हे की रोटी खाने को मिलेगी, लेकिन बड़ा सवाल यह था कि बनाएगा कौन..?






