
जिले में धड़ल्ले से बन और बिक रही मिलावटी खाद्य सामग्री, फूड सेफ्टी की टीम गिन रही महीने की वसूली
त्योहार पर अधिक वसूली के लिए निकलते हैं बाजार में, बाकी समय दुकानदारों से करते हैं उगाही, आमजन के साथ खिलवाड़
शिवपुरी। मध्यप्रदेश का शिवपुरी एकमात्र ऐसा चारागाह जिला है, जिसमें आने के बाद अधिकारी सिर्फ माल कमाते हैं। शनिवार की दोपहर डेढ़ बजे बैराड़ में जब धमाका हुआ, तब पता चला कि वहां नकली मावा बनाने की फैक्ट्री चल रही थी। ऐसा नहीं है कि यह फैक्ट्री फूड सेफ्टी विभाग की टीम से छुपी हुई थी, उन्हें सब पता था, लेकिन महीने की मोटी रकम वसूल कर आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की छूट इसी विभाग ने दे रखी थी। वो तो यदि भटी का बाल्व नहीं फटता तो इस फैक्ट्री और भी कई क्विंटल नकली मावा बनाकर जिलेवासियों को बेच दिया जाता।
जिले में फूड सेफ्टी विभाग की टीम में इंस्पेक्टर आशुतोष मिश्रा एवं विष्णुदत्त शर्मा बरसों से तैनात हैं। यह दोनों अधिकारी न तो जिला मुख्यालय पर और न ही अंचल में बिकने वाली सामग्री की जांच करने जाते। लेकिन इन्हें यह पता रहता है कि किस क्षेत्र में कौन सी मिलावटी खाद्य सामग्री या फिर नकली दूध-पनीर बेचा जा रहा है। यदि कभी कोई उन्हें मिलावटी या नकली खाद्य सामग्री की सूचना देता है, तो यह एड्रेस पूछकर संबंधित मिलावटखोर को फोन पर सूचना देकर उसका माल हटवा देते हैं। जब इन्हें पता चलता है कि माल हटा दिया गया, तो सूचना देने वाले को दिखाने के लिए मौके पर पहुंच जाते हैं।
चूंकि एक ही जिले में बरसों से जमे हुए हैं, इसलिए जिला मुख्यालय से लेकर अंचल में मौजूद सभी मिलावटखोरों को न केवल नाम से जानते हैं, बल्कि उनके मोबाइल नंबर भी उनके पास मौजूद रहते हैं। पिछले वर्ष जब बाहर से फूड सेफ्टी की टीम जांच करने के लिए कलेक्टर ने बुलवाई थी, तो शिवपुरी शहर के कोठी नंबर 14 पर स्थित सभी मसालों की दुकानों की शटर एक हफ्ते तक खुली नहीं थी। बावजूद इसके टीम के जाने बाद हमारे जिले के फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर यह पूछने भी नहीं गए कि दुकानें बंद क्यों करके भागे थे।
जिले में बेरोकटोक मिलावटी खाद्य सामग्री बनाई और बेची जा रही है, जिससे लोगों की तबियत बिगड़ रही है, और इलाज कराने में आवश्यक पैसा बर्बाद कर रहे हैं। जबकि दूसरी ओर फूड सेफ्टी की टीम अवैध वसूली और उपभोक्ता दिवस के कार्यक्रमों में भाषण देने तक ही सीमित हैं।
आगामी 15 मार्च को फिर उपभोक्ता अधिकार दिवस मनेगा, जिसमें उपभोक्ताओं की जगह कंट्रोल की दुकानों के संचालक तथा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी पर्चे बांटकर और फूड सेफ्टी वालों का भाषण सुनकर कार्यक्रम बरसों से मनाते आ रहे हैं।






