
जमीनों का डिजिटल फ्रॉड करने वाले पटवारी व रीडर को किया कलेक्टर ने निलंबित, नायब तहसीलदार के विरुद्ध कमिश्नर को लिख रहे पत्र
करेरा के जरगंवा में दो बार रजिस्ट्री व नामांतरण करने के बाद ऑनलाइन हटाया, शिकायत में फंसा पूरा रैकेट
शिवपुरी। जिले की करेरा तहसील में बरसों से जमे रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव एवं पटवारी बृजेश यादव को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया। इतना ही नहीं, नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव के खिलाफ कार्यवाही के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा है। ज्ञात रहे कि मामले की शिकायत करेरा निवासी डॉ. श्वेता शर्मा ने कलेक्टर से की थी।
यह है मामला:
करेरा के ग्राम जरगंवा में हाइवे किनारे स्थित 4 बीघा जमीन मंगल यादव (पूर्व सरपंच) ने डॉ. श्वेता शर्मा को बेची थी। जिसकी रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण भी तहसील में हो गया था। श्वेता ने उक्त जमीन उमेश गुप्ता को बेच दी, तथा गुप्ता की भी रजिस्ट्री एवं नामांतरण होने के बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड में नजर आने लगा।
फिर बिगड़ा मामला:
सूत्रों की माने तो हाइवे किनारे मौके की जमीन का सौदा जब उमेश गुप्ता ने किसी अन्य पार्टी को अधिक रेट में किया, तो पटवारी बृजेश यादव ने उसमें अपना हिस्सा मांगा। जब गुप्ता ने पैसा देने से मना किया, तो पटवारी बृजेश ने रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव के साथ मिलकर ऑनलाइन नामांतरण गुप्ता का हटा दिया। इस खेल में नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव पर्दे के पीछे शामिल रहे।
गुप्ता की शिकायत में टीआई की दिलचस्पी
ऑनलाइन नामांतरण हटने से परेशान उमेश गुप्ता ने डॉ. श्वेता के खिलाफ करेरा थाने में आवेदन दिया। टीआई करेरा छावई ने पहले फोन करके पैसे वापस करने का दवाब बनाया, और फिर बिना किसी जांच के डॉ. श्वेता के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
एसपी ने मंगवाई डायरी, कलेक्टर ने की जांच
डॉ. श्वेता पर मामला दर्ज होने के बाद अगले ही दिन एसपी अमन सिंह राठौड़ ने केस को जांच में लेकर केस डायरी शिवपुरी मंगवा ली। उधर डॉ श्वेता ने कलेक्टर रविंद्र चौधरी से नवंबर 2025 में शिकायत की थी। जिसकी जांच डिप्टी कलेक्टर एसडी धाकड़ ने करके जब दी तो, कलेक्टर ने पटवारी व रीडर को निलंबित कर लेने के साथ ही नायब तहसीलदार के विरुद्ध कार्यवाही के लिए कमिश्नर को लिखा है।
कलेक्टर रविंद्र चौधरी ने कहा कि उक्त लोगों ने जमीनों के रिकॉर्ड मनमाने अंदाज में तब्दील करके बहुत अधिक गड़बड़झाला किया है।






