May 16, 2026

मामला पीतांबरा कंस्ट्रक्शन कंपनी के भुगतान का, सीएमओ ने पल-पल में बदले बयान, कोर्ट ने जताई नाराजगी
शिवपुरी। नगरपालिका शिवपुरी के सीएमओ इशांक धाकड़ को हाइकोर्ट ग्वालियर ने कड़ी फटकार लगाते हुए रबर स्टांप की तरह काम करने की तल्ख टिप्पणी तक कर डाली। एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को भुगतान न किए जाने पर मामला हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां पर सीएमओ पल-पल में अपने बयान बदलते रहे। इतना ही नहीं कोर्ट ने आदेश की एक कॉपी पीएस अर्बन भोपाल को भी भेजी है।
नगरपालिका शिवपुरी में काम करने वाली मां पीतांबरा कंस्ट्रक्शन कंपनी के लंबित भुगतान का है, जिसे प्राप्त करने के लिए ठेकेदार ने हाईकोर्ट की शरण ली है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ग्वालियर में इस मामले को लेकर यह सब हुआ:

  1. CMO इशांक धाकड़ ने कोर्ट को बताया कि नगर परिषद अध्यक्ष द्वारा भी स्वीकृति दे दी गई है और बैंक को भुगतान के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कोर्ट ने यह देखने के लिए मामला थोड़ी देर बाद रखा कि वास्तव में पैसा खाते में आया है या नहीं।
  2. बाद में CMO ने कहा कि कुल ₹51,78,724/- में से ₹4,35,000/- विवादित है, इसलिए वह राशि नहीं दी गई।
  3. फिर CMO ने अपना बयान बदलकर कहा कि वास्तविक बकाया ₹49,43,583/- है। इस पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई और कहा कि CMO बिना तैयारी के कोर्ट में आए हैं और हर कुछ मिनट में अपना बयान बदल रहे हैं।
  4. कोर्ट ने यह भी कहा कि CMO को यह तक नहीं पता था कि आपके खाते में वास्तव में कितनी राशि जमा हुई है। काफी समय बाद उन्होंने बताया कि statutory deductions काटने के बाद ₹39,51,395/- आपके खाते में जमा किए गए हैं।
  5. जब कोर्ट ने पूछा कि बाकी राशि किन मदों में काटी गई, तो CMO सही जानकारी नहीं दे पाए और बोले कि यह एकाउंट सेक्शन का काम है, वे तो केवल हस्ताक्षर करते हैं। इस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की और कहा कि CMO खुद को “rubber stamp” की तरह पेश कर रहे हैं, जबकि पूरी नगर परिषद के कामकाज के लिए वही जिम्मेदार हैं।
  6. इसके बाद कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई सरकारी संस्था स्वीकार की गई राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसके खिलाफ रिट पिटिशन maintainable होती है और हाईकोर्ट भुगतान का आदेश दे सकता है।
    चूंकि ₹4,35,000/- की राशि को नगर परिषद ने “विवादित” बताया है, इसलिए हाईकोर्ट ने Article 226 के अधिकारों का प्रयोग करते हुए उस राशि के भुगतान का सीधा आदेश नहीं दिया।
  7. अंत में कोर्ट ने कहा:
    • जो “admitted amount” था, वह नगर परिषद द्वारा भुगतान किया जा चुका है।
    • ₹4,35,000/- की रिकवरी के लिए आप वैधानिक/सिविल उपाय (जैसे recovery suit आदि) अपना सकते हैं।
    • इसी liberty के साथ रिट पिटिशन dispose कर दी गई।
  8. कोर्ट ने इस आदेश की प्रति Principal Secretary, Urban Administration, भोपाल को भेजने का भी निर्देश दिया।

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