
गांधी पार्क का मेला, सीएमओ के लिए बना गले की फांस, 23 मार्च को नपा से जारी हुआ था निरस्ती नोटिस
सिद्धेश्वर मेले के लिए निकाली विज्ञप्ति में टेंडर 7 अप्रैल तक लिए जा रहे, यह कहीं पारंपरिक सिद्धेश्वर मेले को खत्म करने की साजिश तो नहीं?
शिवपुरी। अपने काले कारनामों के लिए चर्चित नगरपालिका शिवपुरी के सीएमओ ने अपनी गारंटी पर गांधी पार्क में जो मेला लगवाया था, उसे बीते 23 मार्च को अवैध विद्युत कनेक्शन के फेर में निरस्त करने का नोटिस जारी किया था। इसमें सवाल यह है कि जिस मेले को नपा सीएमओ एक बार निरस्त करने का पत्र जारी कर चुके, तो फिर ऐसी क्या वजह रही कि मेला ठेकेदार ने अभी तक अपना सामान नहीं समेटा..?। उधर सिद्धेश्वर मेले के लिए 7 अप्रैल तक टेंडर आमंत्रित किए हैं, तो क्या शिव की नगरी शिवपुरी का बरसों पुराना प्राचीन सिद्धेश्वर मेला खत्म करने की कोई साजिश है…?
शिवपुरी शहर में किसी भी चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा नहीं है। उनके नाम से गांधी पार्क है, और इसका नाम यह इसलिए रखा गया, क्योंकि गांधीजी की अस्थियों को विसर्जन के लिए ले जाते समय उस मटकी को गांधी पार्क में उस जगह रखा गया था, जहां उनके नाम का चबूतरा है। यह पुराना खेल मैदान है, जिसकी संरक्षक नगरपालिका है। एक लंबे समय तक यह खेल मैदान शादी या अन्य कोई सामाजिक कार्यक्रम के लिए 2-5 दिन के लिए नपा द्वारा किराए पर दिया जाता रहा है। जिससे खिलाड़ियों को भी कोई आपत्ति नहीं होती है। शिवपुरी शहर में ही पले बढ़े सीएमओ इशांक धाकड़ ने इस खेल मैदान को पूरी तरह से व्यावसायिक बनाने के लिए मेले का ठेका बिना किसी लिखित प्रक्रिया के दे दिया। बाद में जब कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने इसकी जांच करवाई, तो पता चला कि सीएमओ अपनी गारंटी पर ही मेला लगवा चुके थे। इस बीच 23 मार्च को नपा सीएमओ ने ठेकेदार को पत्र भेजकर मेला निरस्त कर दिया।
जो मेला 8 दिन पहले निरस्त कर दिया गया, उसके टैंट -तम्बू अभी तक क्यों नहीं उखड़े, यह एक बड़ा सवाल है। उधर स्वदेशी मेला बिना किसी शुल्क लिए देने के मामले में भी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसा लगता है कि मेलों का यह खेल सीएमओ पर भारी पड़ने वाला है, तथा उनके द्वारा वास्तुदोष दूर करने के उपाय भी विफल होते नजर आ रहे हैं। अब देखते हैं शिवपुरी के प्राचीन सिद्धेश्वर मेले को खत्म करने की यह साजिश कैसे सफल हो पाती है. .?






