
…तो फिर एडीएम को दे देना चाहिए इस्तीफा, जब उनकी प्रमाणित भ्रष्टाचार की जांच को झुठला रहीं नपाध्यक्ष
पार्षदों की शिकायतों की जांच प्रशासन ने की, तो मौके पर नहीं मिला काम, सामने आया ओपन भ्रष्टाचार, तो फिर शिकायतें निराधार कैसे
जिला प्रशासन की जांच को नगरीय प्रशासन यदि झुठला रहा, तो फिर यह तय है कि गांधी जी के साथ राजनीतिक आका का बीटों कर रहा काम
शिवपुरी। एक समाचार पत्र में बुधवार को खबर देखी, जिसमें नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा का बयान है कि पार्षदों की शिकायतें निराधार हैं। यह बात उन्होंने 24 फरवरी को नगरीय प्रशासन के सचिव को पेशी के दौरान कही। अब यदि नगरीय प्रशासन के सचिव नपाध्यक्ष की बात को सच मानते हैं, तो फिर शिवपुरी एडीएम को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में लाखों रुपए के भ्रष्टाचार प्रमाणित करने के साथ ही साढ़े 4 करोड़ की रोड रेस्टोरेशन की फाइल सहित 40 फाइलें गायब बताई हैं। प्रशासन की टीम ने वार्डों में घूमकर न केवल भौतिक सत्यापन किया था, बल्कि फीता डालकर भ्रष्टाचार की लम्बाई-चौड़ाई भी नापी थी। यदि नगरीय प्रशासन के सचिव नपाध्यक्ष की सफाई को सही मानते हैं, तो यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि गांधीजी का बोलबाला हो गया, तथा नपाध्यक्ष के राजनीतिक आका का बीटों चल रहा है।
गौरतलब है कि नगरपालिका शिवपुरी ने शहर विकास के नाम पर किए गए भ्रष्टाचार की शिकायत पार्षदों ने जिला कलेक्टर से की थी। उन शिकायतों की जांच कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने एडीएम दिनेशचंद्र शुक्ला से करवाई। जिसमें पटवारी से लेकर एसडीएम ने बिगड़े मौसम के बीच फीता डाल कर नगरपालिका के भ्रष्टाचार को नापा। एडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही भ्रष्टाचार अधिनियम का मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन उसमें नपाध्यक्ष एवं सीएमओ बचे हुए हैं, जबकि जिला न्यायालय तथा हाईकोर्ट अपने आदेश में नपाध्यक्ष व सीएमओ की संलिप्तता का इशारा कर चुके है।
जिस प्रमाणित भ्रष्टाचार में सहायक यंत्री, उपयंत्री एवं ठेकेदार जेल में रहकर आये हैं, तो क्या उन्हें पुलिस ने गलत फंसा दिया?, क्या न्यायालय ने भी उनके खिलाफ कोई गलत निर्णय दिया है?।
नगरपालिका में हुए ओपन भ्रष्टाचार के इस मामले को देखकर तो यही लगता है कि जमकर लूटपाट करो, और उसमें से कुछ हिस्सा उनको पहुंचा दो, जिन पर कार्यवाही की जिम्मेदारी है, तो फिर सभी पाप धुल जाएंगे, और फिर दुगनी ताकत से भ्रष्टाचार करने में जुट जाएंगे। अजब शिवपुरी-गजब मध्योर्देश…!
एक पार्षद ने बताया: भोपाल में कम लगते हैं
SD न्यूज से बातचीत के दौरान एक पार्षद ने बताया कि भोपाल में तो कम पैसों में ही काम हो जाता है। एक रिवॉल्वर लाइसेंस के लिए शिवपुरी के बाबू ने 2 हजार रुपए लिए, जबकि भोपाल के बाबू ने महज 700 रुपए में कर दिया था।
नपाध्यक्ष के इस बयान पर सुनिए वार्ड 21 के पार्षद रघुराज सिंह गुर्जर की बयानी…






