February 4, 2026
शराब पीकर मुर्गा चढ़ाने जा रहे लोगों ने सिपाही का सिर फोड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष ने दिखाया मंत्री की तरह रुतबा

शराब पीकर मुर्गा चढ़ाने जा रहे लोगों ने सिपाही का सिर फोड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष ने दिखाया मंत्री की तरह रुतबा
सिर चढ़कर बोल रही सत्ता की हनक, अपने क्षेत्र में विधायक के भाई वाले मामले में नजर नहीं आए जिलाध्यक्ष

शिवपुरी। जिले में पिछले दो दिन में 2 वीडियो वायरल हुए। जिसके पहले वीडियो में करेरा के भाजपा विधायक के भाई की पुलिस से नौंक झोंक हो रही है, जबकि दूसरे वीडियो में महिला-पुरुष मिलकर एक पुलिस आरक्षक को पीट रहे हैं। इसके बाद तीसरा वीडियो जो आया, उसमें भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव खुद को मंत्री समझकर सत्ता की हनक में यह भूल गए कि उन्हें संगठन ने जो पद दिया है, उसमें वो किसी भी अधिकारी को आदेश नहीं दे सकते, वो भी एफआईआर और सस्पेंड करने का। महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी पार्टी के विधायक के भाई से हुए विवाद में जिलाध्यक्ष होते हुए एक शब्द नहीं बोले, जबकि शराब पीकर मुर्गा चढ़ाने जा रहे वो लोग, जिन्होंने एक सिपाही का सिर फोड़ दिया, उसे सजा देने का आदेश देने पहुंच गए।
भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने शुक्रवार की देर शाम रन्नौद पहुंचकर न केवल अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एसडीओपी को आदेशित के रहे हैं, बल्कि उन लोगों को निरीह बता रहे हैं, जिन्होंने खाकी पर अटैक करके उसे लहूलुहान कर दिया।
यदि हम भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव के राजनीतिक कैरियर की बात करें तो वो एक बार जनता की पसंद बनकर कांग्रेस से विधायक बने, तथा प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराते समय केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए विधायकी छोड़ दी। लेकिन इन दो साल के कार्यकाल में जसमंत ने जनता के बीच इतना विरोध ले लिया कि जब भाजपा से उपचुनाव लड़े तो पूरी सरकार की ताकत लगने के बावजूद जनता ने सबसे बड़ी हार देकर नकार दिया। चूंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने के बाद सिंधिया का कद भाजपा के दिल्ली नेतृत्व में बढ़ गया। जिसके चलते जनता द्वारा नकारे जाने के बावजूद केबिनेट मंत्री का दर्जा और अब पार्टी का जिलाध्यक्ष बन गए। इससे पहले भी भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे, लेकिन सत्ता की ऐसी हनक किसी में नजर नहीं आई।
यदि पुलिस की कार्यवाही से भाजपा जिलाध्यक्ष इतने व्यथित हैं, तो उन्हें नरवर में हुए उस विवाद में भी हस्तक्षेप करना चाहिए था, जिसमें उनकी ही पार्टी के विधायक के भाई की गाड़ी की चाबी निकाल ली गई थी। चूंकि रमेश खटीक भले ही भाजपा के विधायक हैं, लेकिन उनका अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष से 36 का आंकड़ा है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में वर्तमान जिलाध्यक्ष ने भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ काम करने की चर्चा सरगर्म रहीं थी।

शराब पीकर मुर्गा चढ़ाने जा रहे लोगों ने सिपाही का सिर फोड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष ने दिखाया मंत्री की तरह रुतबा

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