
भ्रष्टाचार का गढ़ बनी करेरा तहसील, रिटायर्ड फौजी ने परिवार सहित खुद पर डाला पेट्रोल
अफसोस: कलेक्टर को भी पता है कि करेरा तहसील में जमीनों का सबसे बड़ा गोलमाल, फिर भी उनकी चुप्पी आश्चर्यजनक
शिवपुरी। जिले के करेरा तहसील पिछले लंबे समय से भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी है। यहाँ पर मौजूद राजस्व विभाग की टीम लीगल कामों के लिए रिश्वत लेने के साथ ही जमीन में प्लॉट भी मांगते हैं। ऐसा ही एक मामला गुरुवार की शाम को तहसील में आया, जिसमें एक रिटायर्ड फौजी अपने परिवार सहित पेट्रोल डालकर आत्मदाह के लिए पहुंच गया। फौजी ने खुलेआम आरोप लगाए कि बंटवारा मनमाने तरीके से करके तहसीलदार को प्लॉट चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस पटवारी हल्का नंबर में यह घोटाले हो रहे हैं, उसकी जानकारी कलेक्टर को भी पता है, लेकिन उनकी चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।
करेरा तहसील में नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव, रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव एवं पटवारी बृजेश का ऐसा संगठन है, जो अपने मनमाने अंदाज में जमीनों का रिकॉर्ड बदलकर न केवल लाखों की अवैध वसूली कर रहे हैं, बल्कि जमीन में प्लॉट तक रिश्वत में ले रहे हैं। आज शाम रिटायर्ड बीएसएफ फौजी केके पाठक अपने वृद्ध पिता और छोटे बच्चों को लेकर शाम 4 बजे तहसील कार्यालय पहुंचा, और खुद सहित परिवारजनों पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया।
फौजी का आरोप है कि हमारे पिता के पांच भाई है, और उनके नाम की 26 नम्बरों में 40 बीघा जमीन है। पाठक का कहना है कि हमारे चाचा को प्रधानमंत्री सड़क के किनारे की बंटवारे में देकर तहसीलदार, रीडर और पटवारी को प्लॉट चाहिए, इसलिए वो बंटवारे को अपने मनमाने अंदाज में कर रहे हैं। जबकि हमारी मांग है कि सभी 26 नम्बरों में बराबर 5 हिस्से बाँटे जाएं।
करेरा तहसील में यह हालात तब हैं जबकि पिछले दिनों जमीन के एक मामले में वक़ील की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसमें तो पुलिस पर भी मामले निपटाने के एवज में अवैध वसूली के आरोप लगे थे।
फौजी जिस थनरा की बात कर रहा है, उसका पटवारी बृजेश उसी पटवारी हल्के के ग्राम जरगँवा में भी तहसील के इस गिरोह में जमीनों के रिकॉर्ड में बड़ी हेराफेरी की है। इस गड़बड़झाले को कलेक्टर भी पकड़ चुके हैं, लेकिन उनकी कलम कार्यवाही करने से क्यों डर रही है, यह समझ से परे है।






