
आवारा मवेशी शिवपुरी के बाजार में ही नहीं, कलेक्ट्रेट में भी कर रहे विचरण, मवेशी मुक्त शहर बनाने का दावा खोखला
पहले सूअरों को साफ करने आए थे हैदराबाद के नवाब, आवारा कुत्तों की नसबंदी भी अधर में
शिवपुरी। जिस शहर को आधुनिक पर्यटन नगरी बनाने का दावा किया जा रहा है, उसमें आवारा मवेशी सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं। शिवपुरी शहर का बाजार तो दूर यह मवेशी कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बेरोकटोक विचरण कर रहे हैं।
गौरतलब है कि शिवपुरी शहर में सबसे पहले सूअरों का आतंक था, जिसे खत्म करने के लिए तत्कालीन विधायक व केबिनेट मंत्री ने कोर्ट में लगी पीआईएल में हुए आदेश को आधार बनाकर हैदराबाद के शूटर नवाब को बुलवाया था। उस दौरान रात के अंधेरे में नवाब की टीम सूअरों का शूट आउट करती थी। शूट आउट से पहले उस क्षेत्र में यह अनाउंस किया जाता था कि लोग अपने घर में ही रहें। हालांकि शूटआउट में भी कुछ गड़बड़झाला हुआ, तो उसे बंद कर दिया गया, लेकिन शहर सुअर मुक्त हो गया था।
इसके बाद आवारा कुत्तों का आतंक कुछ इस कदर सिर चढ़कर बोला कि एक दिन में 100 कुत्तों का शिकार लोग इंजेक्शन लगवाने आने लगे। इस बीच नपा के जिम्मेदारों ने दावा किया कि कुत्तों की नसबंदी कराई जाएगी, लेकिन वो प्रक्रिया भी अधर में लटक गई। अब शहर में आवारा सांड और पालतू गौवंश की भरमार है। शहर का कोई भी प्रमुख चौराहों हो या मुख्य सड़क, सभी जगह मवेशियों का ऐसा जमघट लगा रहता है, मानो यह शहर न होकर तबेला हो। इतना ही नहीं पिछले दिनों नगरपालिका की महिला सफाईकर्मी को भी अपना शिकार बनाया। जबकि इससे पूर्व दो लोगों की जान तक जा चुकी है, जबकि आधा सैकड़ा लोग हाथ-पैरों में फैक्चर करवा चुके हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश सरकार गौशाला के नाम पर अभी तक करोड़ों रुपए खर्च के चुकी है, बावजूद इसके गौवंश अब बाजार के अलावा कलेक्ट्रेट में घूमकर व्यवस्था को आईना दिखा रहा है।






