
आवारा बाघिन को टाइगर रिजर्व की टीम ने किया ट्रेंकुलाइज, स्ट्रेचर पर लिटाकर लाए, होश में आने से कुछ देर पहले छोड़ेंगे
महंगा टिकिट लेकर टाइगर देखने जा रहे टूरिस्टों को नहीं दिख रहा, गांव वाले पास में देखकर छुपते फिर रहे
शिवपुरी। माधव टाइगर रिजर्व शिवपुरी में लाई गई एमटी- 6 बाघिन पार्क की सीमा को पार करके रिहायशी इलाकों की तरफ भाग रही है। जिसके चलते बीते एक माह में उसे दूसरी बार ट्रेंकुलाइज करके टाइगर रिजर्व की टीम स्ट्रेचर पर अपने साथ लाई। उसे होश में आने से कुछ देर पहले उसे पार्क सीमा के अंदर छोड़ देंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि सैलानियों को महंगा टिकिट खर्च करने पर भी टाइगर नहीं दिखता, और वो हिरण, नीलगाय देखकर मायूस होकर आते है, वहीं दूसरी ओर शिवपुरी के ग्रामीण क्षेत्र के लोग उसे बिना टिकिट के अपने पास देखकर भयभीत हैं।
बीते रोज नरवर के ऐरावत गांव में बाघिन द्वारा किए गए भैंस के शिकार के बाद पूरा गांव दृष्टजदा हो गया था। यही बाघिन एक माह पूर्व सतनबाडा एवं कोटा-झांसी फोरलेन के किनारे सुरवाया क्षेत्र में बसे गांव में भी दहशत का कारण बनी थी।
शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में 4 बाघिन व 2 नर बाघ लाए गए। इनमें से एक बाघिन का कथित तौर पर शिकार हो गया, लेकिन प्रबंधन उसे लापता मान रहा है। एक बाघिन के दो शावक होने की बात प्रबंधन ने बताते हुए एक शावक का फोटो भी दिया था। इस तरह वर्तमान में टाइगर रिजर्व में 7 टाइगर है। इनमें से लगभग सभी के गले में लटकाए गए रेडियो कॉलर भी बंद हो गए, इसलिए हाथियों की मदद से उन दुर्गम स्थानों पर स्टाफ जा रहा है, जहां गाड़ी नहीं जा सकती। तो फिर टूरिस्टों को ले जाने वाली गाड़ियां कैसे टाइगर को देख पाएंगी। यही वजह है कि महज 7 टाइगरों के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा दे दिया गया, जबकि सैलानियों को टाइगर दिखते ही नहीं हैं।
बाघिन के चेहरे पर चोट है, उसे दिखवा रहे हैं
एमटी -6 जंगल में ही थी, उसके पास गांव है। इस बाघिन का रेडियो कॉलर काम कर रहा है, इसलिए हमारी टीम साथ में चल रही है, उसे ट्रेंकुल्युलाइज करके लाए हैं। टाइगर पहले लोकल वालों को दिखना चाहिए, टूरिस्ट तो बाहर से आते हैं।
उत्तम कुमार शर्मा, सीसीएफ सिंह परियोजना






