
विधानसभा में जनता के मुद्दों पर चर्चा होने की बजाए पूछा राम की माँ का नाम, पिछोर विधायक ने भी झाड़ा पल्ला
पोहरी विधायक बोले: मेरे सामने तो यह सवाल नहीं हुआ था, लेकिन चर्चा सदन में यही रही कि पिछोर विधायक नाम नहीं बता पाए
शिवपुरी से सैमुअल दास:
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में होने वाला विधानसभा सत्र इसलिए रखा जाता है, ताकि विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाएं।प्रदेश की विधानसभा में विधायक ऐसे सवाल कर रहे हैं, मानो कौन बनेगा करोड़पति चल रहा हो। हालांकि पिछोर विधायक की इस मामले में फजीहत हो रही है कि वो भाजपा विधायक होकर भी भगवान राम की माता का नाम नहीं बता पाए।
ज्ञात रहे कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का नाम जब केंद्र सरकार ने बदलकर जी रामजी योजना किया, तो स्थानीय स्तर पर मीडिया ने भी नेताओं से सवाल किए थे। आज विधानसभा में सत्र के दौरान इसी नामकरण पर जब चर्चा चल रही थी, तो कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ने पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी से यह पूछ लिया कि राम की माँ का नाम क्या था। अब प्रीतम लोधी जैसे विधायक से अपराधिक दुनिया से जुड़ा कोई सवाल करते, तो भी वो उसका जवाब दे देते। अब एकाएक भगवान राम की माँ के नाम वाले सवाल पर प्रीतम सकपका गए। अब यदि यह अमिताभ बच्चन का केबीसी शो होता, तो वो कोई लाइफ़ लाइन यूज कर लेते, लेकिन जब सवाल विधानसभा सत्र में एकाएक सामने आया, तो प्रीतम लोधी ने जवाब देने की बजाए यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मैं इनको जवाब क्यों दूं..?। हालांकि आजकल तो धरती के दूसरे भगवान बने गूगल बाबा को ही प्रीतम कष्ट दे देते, तो वो भी तत्काल जवा। दे देते।
इस संबंध में जब पोहरी विधायक कैलाश कुशवाह से SD न्यूज ने जब पूछा, तो कुशवाह बोले कि यह सवाल मेरे सामने तो नहीं हुआ था, मैं किसी काम से उस समय बाहर चला गया था, लेकिन वापस आने पर पूरा सदन यह चर्चा कर रहा था कि पिछोर के भाजपा विधायक प्रीतम लोधी भगवान राम की माँ का नाम नहीं बता पाए। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के लोगों को यह मुद्दा दे दिया कि रामभक्त पार्टी भाजपा के विधायक को भगवान राम की माँ का नाम पता नहीं है। हालांकि जब टीवी पर रामायण आती थी, तो उस समय टीवी पर रामायण का क्रेज इतना अधिक था कि रामायण के सभी पात्रों को केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों के लोगों को भी सभी नाम याद हो गए थे।
जनहित के मुद्दे पर जवाब नहीं देती सरकार
मध्यप्रदेश की विधानसभा में जब जनता से जुड़े बिजली के मुद्दे को नेता परिपेक्ष उमंग सिंघार ने उठाया था कि अदाणी ग्रुप से इतनी महंगी बिजली खरीदने का करार करके सरकार क्यों गरीब जनता की जेब काटना चाहती है, तो इसका जवाब देने की बजाए औकात में रहने जैसे शब्दों का उपयोग किया गया।






