
शिवपुरी में मिले 735 गिद्ध, आबादी न बढ़ने से सड़ांध मारते हैं जिले से गुजरे दोनों हाईवे
मवेशियों का मांस खाने से बीमार होकर मर रहे गिद्ध, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई ‘डाइक्लोफेनैक’ पर रोक
शिवपुरी। प्रकृति में सफाईकर्मी के रूप पहचानें जाने वाले गिद्धों की गिनती शिवपुरी में पूरी हो गई। जिले के जंगल में कुल 735 गिद्ध मिले, जो पिछली गणना के लगभग बराबर ही है, इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई। गिद्धों की संख्या कम होने की वजह से ही शिवपुरी जिले से गुजरे दोनों हाईवे पर अक्सर सड़ांध आती रहती है, क्योंकि सड़क हादसों में मृत होने वाले मवेशियों को खाकर नष्ट करने वाले गिद्ध कम हो गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि मृत होने वाले मवेशियों का मांस खाकर ही गिद्ध बीमार जब मरने लगे थे, तब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डाइक्लोफेनैक दवा पर प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना प्रथम चरण के अन्तर्गत शिवपुरी जिले के वन विभाग के मैदानी अमले एवं अधिकारियों द्वारा हाल ही में गिद्धों की गणना का कार्य पूरा किया। वन विभाग द्वारा इस गणना कार्य में पहली बार ‘Epicollect5’ मोबाइल ऐप का उपयोग किया गया। इसमें मुख्यतः इंडियन लॉन्ग बिल्ड वल्चर, किंग वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, यूरेशियन ग्रिफन, हिमालय ग्रिफन प्रजातियां पाई गई। इस वर्ष की गणना में जिले के अंतर्गत विशेष रूप से माधव टाईगर रिजर्व, सतनवाड़ा, पोहरी, शिवपुरी के वन क्षेत्रों में गिद्धों की सर्वाधिक सघन आबादी देखी गई है।
पर्यावरण संतुलन में गिद्धों की अहम भूमिका:
गिद्ध पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मृत पशुओं के अवशेषों को शीघ्रता से साफ कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने एवं संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने में सहायक होते हैं। वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में देश भर में प्रकृति के इन सफाईकर्मियों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से भारी गिरावट आई थी। इसका मुख्य कारण मवेशियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दर्द निवारक दवा ‘डाइक्लोफेनैक’ (Diclofenac) का उपयोग था। इस दवा से उपचारित मृत पशुओं का मांस खाने के कारण गिद्धों में किडनी (गुर्दे) की विफलता (Renal Failure) की समस्या उत्पन्न हुई, जिससे उनकी भारी संख्या में मृत्यु हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक:
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के आदेशानुसार पशु चिकित्सा में ‘डाइक्लोफेनैक’ के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके अलावा मध्य प्रदेश शासन और वन विभाग द्वारा गिद्धों के संरक्षण और उनके रहवास सुधार के लिए काफी प्रयास किए। वर्तमान में मध्य प्रदेश पूरे देश में सर्वाधिक गिद्धों की आबादी के साथ ‘गिद्ध राज्य’ होने का गौरव प्राप्त कर चुका है।






