
शिवपुरी को बचाना है: सीएमओ को भगाना है, के लगे कलेक्ट्रेट में नारे, खेल मैदान को मेला ग्राउंड बनाने का विरोध
जिस तरह देश का संविधान खतरे में बताया जाता है, उसी तरह शिवपुरी की परंपरा को बदलने की तैयारी
शिवपुरी। यूँ तो शनिवार को प्रशासन का अघोषित अवकाश रहता है, इस बीच शनिवार को ओबीसी महासभा के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नारे लगाए कि – शिवपुरी को बचाना है, सीएमओ को भगाना है। वैसे भी सीएमओ सस्पेंड होकर स्टे पर रुककर इस तरह का विरोध झेल रहे हैं।
देश में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल संविधान को खतरा बताकर उसे बचाने की अपील कर रहे हैं, ठीक उसी तरह शिवपुरी की जनता अपनी पारंपरिक चीजों को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। नगरपालिका सीएमओ ने एक तरफ सिद्धेश्वर मेले का टेंडर निकाल दिया, तो वहीं दूसरी ओर कथित तौर पर सेवा शुल्क लेकर एक अपराधिक व्यक्ति को खेल मैदान गांधी पार्क में मेले की परमीशन दे दी। इतना ही नहीं, उसे ठेका देने के लिए वो शर्त भी हटा ली, जिसमें ठेकेदार का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी था। यानि सिद्धेश्वर मेले की तरह गांधी पार्क में भी जुआ, शराब और मारपीट की घटनाओं को खुली छूट दे दी। जब गांधी पार्क में मेला चलेगा, तो सिद्धेश्वर मेला घूमने कौन जाएगा?। इस तरह शिवपुरी के सैकड़ों वर्ष पुराने सिद्धेश्वर मेले का अस्तित्व खत्म करने पर सस्पेंडेड सीएमओ उतारू है।
एक तरफ जहां खिलाड़ी इस खेल मैदान को मेला ग्राउंड बनाने का विरोध कर रहे हैं, तो वहीं मैदान में घूमने आने वाले एवं आसपास रहने वाले लोग भी इस पर आपत्ति कर रहे हैं। ओबीसी ंगमहासभा ने चेतावनी दी है कि यदि मेला नहीं रोका गया, तो वो खुद सैकड़ों की संख्या में आकर मेले को उखाड़ फेंकेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
खुद को आईएएस समझते हैं सीएमओ
शिवपुरी शहर के रहने वाले इशांक धाकड़ को अपने ही गृहनगर में सीएमओ जैसा पद क्यों दिया गया, यही बड़ा सवाल है। बताते हैं कि आईएएस की तैयारी कर रहे थे, लेकिन नहीं बन पाए। वो फ्रस्ट्रेशन बातचीत में नजर आता है, जो पिछले वीडियो में आपने देखा होगा। जनता का नौकर होकर जनता से बात करने की तमीज नहीं सीख पाए, इसलिए गुना में माला पहनाई गई थी शायद…!







