
शिवपुरी का कायाकल्प सिर्फ फोटो में शुरू हो पाया, धरातल पर तो हालात बेहद खराब हैं
जिस खेल मैदान पोलोग्राउंड पर खड़े होकर देखे कायाकल्प के लिए नक्शे, उसमें गंदगी के बीच शराब की फूटी बोतल, स्मैक की सिरिंज
शिवपुरी। केंद्रीय मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद की ऑनलाइन समीक्षा बैठकों में तय हुआ कि शिवपुरी को आधुनिक पर्यटन नगरी बनाएंगे। तीसरी ऑनलाइन समीक्षा बैठक के लगभग 10 दिन बाद कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी इकट्ठे हुए, नक्शे भी देखे गए।इसके बाद अखबारों में फोटो सहित खबरें भी छपी कि शिवपुरी शहर के कायाकल्प की शुरुआत पोलो ग्राउंड से होगी। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी सहित अन्य खेलों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि शिवपुरी पेरिस और न जाने क्या-क्या बनाने के दावे किए गए, फिर भी खबरों पर यह सोचकर थोड़ा भरोसा कर लिया कि शायद अब कुछ हो जाए।
इस फोटोसेशन के लगभग एक माह बाद आज शुक्रवार को युवाओं को फिजिकल ट्रेनिंग देने के लिए हर रोज अलसुबह ग्राउंड में आने वाले ट्रेनर प्रदीप रावत से बात हुई। उन्होंने बताया कि ग्राउंड के किनारे गंदगी और कचरे से भरे पड़े हैं। सुबह जब रनिंग करने के लिए हमारे ट्रेनीज युवक-युवतियां आते हैं तो रनिंग ट्रैक पर शराब की फूटी बोतलें और नशा लेने वाली सिरिंज पड़ी मिलती हैं। ग्राउंड के गेटों पर वो ताले लगवाते हैं, लेकिन शराब पार्टी वाले उन्हें तोड़कर अंदर पार्टी मनाते हैं, और पार्टी का कचरा वहीं छोड़ जाते हैं। चूंकि यह ग्राउंड शहर के हृदय स्थल पर है, इसलिए यहां हर वर्ग के लोग घूमने और खेलने आते हैं। इस खेल मैदान से कायाकल्प की शुरुआत की सिर्फ खबरें ही दिखाई दीं, जबकि ग्राउंड पर झाडू तक नहीं लगी।
ग्राउंड के चारों तरफ विधायक निधि से हाईमास्ट तो लगाए गए हैं, लेकिन कभी कोई बंद तो कभी कोई दिन में भी जगमगाता रहता है। यह खेल मैदान कलेक्ट्रेट के सामने है, तो यहां पर भी पुलिस की गश्त आदि होनी चाहिए, ताकि आधी रात के बाद नशेड़ियों का अड्डा बनने से यह मैदान बच जाए।

जानकारी देते फिजिकल ट्रेनर प्रदीप रावत






