February 23, 2026
सपनों का शहर शिवपुरी: नेताओं के साथ अब अधिकारी भी दिखाते हैं। झूठे सपने, धरातल पर शून्य

सपनों का शहर शिवपुरी: नेताओं के साथ अब अधिकारी भी दिखाते हैं। झूठे सपने, धरातल पर शून्य
तालाब सफाई में बिना कोई सहयोग किए, कार्यक्रम में बैनर लगाने वाली नपा सफाई के नाम पर कर रही भ्रष्टाचार

शिवपुरी। मध्यप्रदेश का शिवपुरी ऐसा शहर है, जिसमें रहने वाली पौने 3 लाख की आबादी को झूठे सपने दिखाने का काम बरसों से चल रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले यह काम नेता करते थे, और अब अधिकारी भी इसमें पारंगत हो गए हैं। यही वजह है कि शिवपुरी की जनता विजन शिवपुरी की उस झांकी को भी झूठा मान रही है।
शिवपुरी शहर में सिद्धेश्वर मंदिर के सामने सड़क के दूसरी ओर भुजरिया तालाब है। इस तालाब पर जब भी संकट आया, तो ऐसा लगा कि उसने हमें पुकारा। लगभग 7 साल पूर्व जब इस तालाब को कचरे से भरने और मकान बनाकर उसका अस्तित्व खत्म करने की होड मची थी, उस समय मैं किस संस्थान में कार्यरत था, तब इस तालाब के गहरीकरण का काम लिया था। इस तालाब में जब भी जल संरक्षण का अभियान चलाया, तो वो फोटो सेशन की जगह धरातल पर काम किया। उस समय कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव थे, जिनकी मदद से इस तालाब का गहरीकरण करने को पोकलेन व जेसीबी लगाई हैं। तालाब की गहराई होने से पानी भरा रहने लगा, तथा तालाब में कब्जे रुक गए।
उसके बाद वर्ष 2024 में जब यह तालाब पूरी तरह से जलकुंभी से जकड़ा हुआ था, तब फिर तालाब ने पुकारा, और हमने इसमें अभियान चलाया।इस बार कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने इसमें सहयोग किया, और तालाब को जलकुंभी मुक्त करवाया। महत्वपूर्ण बात यह थीं कि कलेक्टर श्री चौधरी को पहले पता ही नहीं था कि यहां पर भी एक तालाब है।

फिर दिखाया झूठा सपना

भुजरिया तालाब को जलकुंभी से मुक्त कराने के दौरान लगभग पूरा शहर ही जुड़ गया था, लेकिन नगरपालिका ने उसमें कोई सहयोग नहीं किया था। जब तालाब साफ होने के बाद कार्यक्रम हुआ तो नगरपालिका ने अपना बड़ा बैनर लगाकर उन लोगों के बड़े फोटो चिपका दिए थे, जो सफाई के दौरान एक बार भी देखने नहीं आये। शहर के बीच में स्थित इस तालाब को चौपाटी बनाने के दावे प्रशासन ने न केवल किए, बल्कि अशोक अग्रवाल की बेटी ने उसका डिजाइन भी तैयार किया। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस दौरान ने नगरपालिका ने अपनी अवैध कमाई के लिए तालाब की सफाई का ठेका करके बिना सफाई किए, लाखों रुपए के भुगतान का बंदरबांट शुरू कर दिया। इसलिए हमने कहा है कि शिवपुरी सपनों का शहर है। आपकी क्या राय है..?

सपनों का शहर शिवपुरी: नेताओं के साथ अब अधिकारी भी दिखाते हैं। झूठे सपने, धरातल पर शून्य

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