
संकट रसोई गैस का: आधा पकाए आधा कच्चा बना रहीं खाना, देर तक चाय न खोलने से उसका स्वाद भी बिगड़ा
देश के प्रधानमंत्री ने दी हर स्थिति से निपटने की सलाह, यहां चूल्हे पर खाना बनाने की महिलाओं को आदत नहीं
शिवपुरी। ईरान व अमेरिका-इजरायल युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, और इधर भारत में महिलाओं की चिंता रसोई गैस को लेकर बढ़ती का रही है। स्थिति यह है कि पहले दो सब्जी और दाल भी बन जाया करती थी, लेकिन जबसे गैस सिलेंडर की मारामारी शुरू हुई, तबसे महिलाओं की नजर गैस चूल्हे पर लगी हुई है, कि कहीं यह साथ न छोड़ जाए।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों संसद में कह दिया कि देशवासी हर स्थिति से निपटने को तैयार रहें। उनका इशारा साफ था कि देश में रसोई गैस सिलेंडर, डीजल व पेट्रोल जैसी आवश्यक वस्तुएं आसानी से नहीं मिल पाएंगी। ऐसे में सबसे अधिक चिंतित महिलाएं हैं, क्योंकि जब घर में सिलेंडर होगा, तभी चूल्हा जलेगा, और परिवार को खाना खिलवा पाएंगी। सिलेंडर में गैस की बचत करने के फेर में महिलाएं घरों में अधपका खाना बनाकर गैस बंद कर देती हैं। चाय को तो जितना खौलाया जाता है, उतना स्वाद बढ़ता है, लेकिन अब गैस बचाने के चक्कर में चाय के खौलते ही गैस बंद कर दी जाती है।
जब इस संबंध में महिलाओं से बात की, तो उनका कहना था कि अब अधिकांश खाना कुकर में बना रहे हैं, तथा एक ही सब्जी, जो सिर्फ गल जाए तो गैस बंद कर देते हैं। उनका कहना है कि पति व बच्चे भी बेस्वाद चाय और खाने के बारे में जब बोलते हैं, तो हम भी कह देते हैं, कि सिलेंडर एक्स्ट्रा ले आओ, तो हम खाना भी ठीक से पका कर देंगे।
बेरोजगार हुए कई परिवार
शिवपुरी ही नहीं देश भर में अधिकांश चाट – पकौड़ी वालों से लेकर नाश्ता आदि की दुकान संचालित करने वाले दुकानदार अभी तक घरेलू सिलेंडर का उपयोग कर रहे थे। ईरान युद्ध के बाद अब चाट के ठेलों से लेकर पक्की दुकान में नाश्ता बनाकर बेच रहे दुकानदारों के प्रतिष्ठान पर आए दिन फूड विभाग की टीम छापा मारकर सिलेंडर जब्त कर रही है। जिसके चलते शहर सहित जिले में सैकड़ों परिवार बेरोजगार हो गए, क्योंकि उनका परिवार उनकी दुकान से ही चलता था।






