
रात भारी या फिर सब कुछ सेट..?, मंगलवार को भोपाल में नगरीय प्रशासन के सामने नपाध्यक्ष व सीएमओ की पेशी
प्रशासन द्वारा की गई भ्रष्टाचार की प्रमाणित जांच रिपोर्ट के बाद भी यदि मिला अभयदान, तो फिर पावरफुल बीटों व गांधी जी का जलवा
शिवपुरी। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी नगरपालिका शिवपुरी की अध्यक्ष सहित तीन सीएमओ की पेशी 24 फरवरी मंगलवार को नगरीय प्रशासन विभाग बल्लभ भवन भोपाल में है। नपाध्यक्ष व सीएमओ को जिस कारण बताओ नोटिस का जवाब मांगने के बाद पेशी लगाई गई है, वो शिवपुरी एडीएम दिनेशचंद्र शुक्ला द्वारा जांच में पाया गया भ्रष्टाचार की प्रमाणित रिपोर्ट है। जिसमें नपा के जिम्मेदारों के बचने का कोई चांस ही नहीं है। इतने पर भी यदि अभयदान दिया जाता है, तो उसमें यह तय माना जाएगा कि राजनीतिक आका का बीटों के साथ गांधी जी की भी अहम भूमिका रही है।
इस पूरे एपीसोड की शुरुआत पार्षदों द्वारा की गईं भ्रष्टाचार की शिकायतें से हुई। इसके बाद जब पार्षदों ने इस्तीफे की कसम करेरा के बगीचा सरकार में खाई, तो जिला कलेक्टर ने शिकायतों की जांच एडीएम दिनेशचंद्र शुक्ला को दे दी। प्रत्येक वार्ड में काम के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की जांच करने प्रशासन की टीम ने मौके पर जाकर आमजन से बातचीत भी की। एडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर नपा में अटैच दो संविदा उपयंत्री व सहायक यंत्री सहित ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज हुए, तथा वो जेल भी होकर आए। इस मामले में न्यायालय स्वयं अपने दो निर्णयों में यह लिख चुका है कि जितनी राशि का भ्रष्टाचार किया गया, उस पर ईई, नपा सीएमओ एवं अध्यक्ष के भी हस्ताक्षर थे, तो फिर वो दोषी क्यों नहीं..?।
नाराज पार्षदों को मनाने के लिए केंद्रीय मंत्री के खास सिपहसलार प्रभारी मंत्री एवं भाजपाआ जिलाध्यक्ष ने दिन रात बैठकें करके पार्षदों को मनाकर अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन वापस करवाया। उस दौरान उक्त दोनों नेताओं ने पार्षदों से आवेदन वापस करवा कर फिर उन्हें दूध में गिरी मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया। पार्षद भी विरोध करके थक गए, लेकिन प्रशासन द्वारा की गई जांच रिपोर्ट नगरीय प्रशासन विभाग बल्लभ भवन भोपाल भेज दी।
उसी जांच रिपोर्ट पर नपाध्यक्ष व सीएमओ को कारण बताओ नोटिस देकर 15 दिन में जवाब मांगा। सूत्रों की माने। तो लगभग 100 पेज का जवाब भोपाल पहुंचाया गया। इस बीच सीएमओ लगातार भोपाल के चक्कर लगा रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि मैनेजमेंट क्या हुआ?, क्या उन राजनीतिक आका की पावर चली या फिर गांधी जी के मुस्कुराते हुए चेहरे के कीमती कागजों की गड्डी। क्योंकि प्रभारी मंत्री और जिलाध्यक्ष ने नपाध्यक्ष को केंद्रीय मंत्री के सामने अबला बताया है।






